Shri Manibhadra Veer Chand श्री माणिभद्रवीर छंद
सरस वचन द्यो सरस्वति, पूजुं गुरु के पाय;
गुण माणिकनां गावतां, सेवकने सुख थाय. 1
माणिभद्रने पामीओ, सुरतरु जेहवो सांम;
रोग सोग दूरे हरे, नमुं चरण शिरनांम 2
तुं पारस तुं पोरसो, काम कुंभ सुखकार;
साहिब वरदाई सदा, आतमनो आधार. 3
तुंहि चिंतामणि रतन, चित्रावेल विचारः
माणक साहेब माहरे, दोल्तरो दातार. 4
देव घणा दुनिया नमे, सुता करे सन्मान;
माणिभद्र मोटो मर्द, दीपे देस दिवाण. 5
Shri Manibhadra Veer Chand श्री माणिभद्रवीर छंद
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