No. 38 Shri Manibhadra Veer Chand श्री माणिभद्रवीर छंद

Shri Manibhadra Veer Chand श्री माणिभद्रवीर छंद

 

सरस वचन द्यो सरस्वति, पूजुं गुरु के पाय; 

गुण माणिकनां गावतां, सेवकने सुख थाय. 1

माणिभद्रने पामीओ, सुरतरु जेहवो सांम;

रोग सोग दूरे हरे, नमुं चरण शिरनांम       2

तुं पारस तुं पोरसो, काम कुंभ सुखकार; 

साहिब वरदाई सदा, आतमनो आधार.    3

तुंहि चिंतामणि रतन, चित्रावेल विचारः 

माणक साहेब माहरे, दोल्तरो दातार.      4

देव घणा दुनिया नमे, सुता करे सन्मान;

माणिभद्र मोटो मर्द, दीपे देस दिवाण.     5

Shri Manibhadra Veer Chand श्री माणिभद्रवीर छंद

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श्री नाकोड़ा भैरव जी

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