No. 39 Shri Gautam Swami Raas श्री गौतमस्वामीनो रास

Shri Gautam Swami Raas श्री गौतमस्वामीनो रास   ढाल पहेली वीर जिणेसर चरण कमल कमला कय वासो  पणमवि पभणिसु सामि, सार गोयमगुरु रासो;  मण तणु वयण एकंत करवि, निसुणो भो भविआ,  जिम निवसे तुम देहगेह, गुणगण गहगहिआ               1 जंबुदीव सिरिभरहखित्त, खोणी तलमंडण,  मगधदेश सेणियनरेस, रिउदलबलखंडण;  घणवरगुव्वरनाम गाम, जहि

No. 38 Shri Manibhadra Veer Chand श्री माणिभद्रवीर छंद

Shri Manibhadra Veer Chand श्री माणिभद्रवीर छंद   सरस वचन द्यो सरस्वति, पूजुं गुरु के पाय;  गुण माणिकनां गावतां, सेवकने सुख थाय. 1 माणिभद्रने पामीओ, सुरतरु जेहवो सांम; रोग सोग दूरे हरे, नमुं चरण शिरनांम       2 तुं पारस तुं पोरसो, काम कुंभ सुखकार;  साहिब वरदाई सदा, आतमनो आधार.    3 तुंहि चिंतामणि

No. 36 Shree Padmavathi Stotram श्री पद्मावती स्तोत्रम्

23वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ परमात्मा की सेविका, श्री पद्मावती देवी को समर्पित Shree Padmavathi Stotram  है। इस स्तोत्र में माँ, पद्मावती के विभिन्न दिव्य रूपों, नाम और महान शक्तियों का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र, मृत्यु, दरिद्रता आदि सभी पापों के एवं रोगों को तथा नकारात्मक शक्तियों को नाश करने वाला है। इस स्तोत्र

No. 35 Shri Tribhuvana Swamini Devi Stotram श्री त्रिभुवनस्वामिनी देवी स्तोत्रम्

श्री त्रिभुवन स्वामिनी देवी स्तोत्र (Shri Tribhuvana Swamini Devi Stotram) जो सूरी मंत्र की मुख्य अधिष्ठायीका है, वैसे त्रिभुवन स्वामिनी देवी के चरणों में यह स्रोत समर्पित है। यह देवी मनुष्य, पशु पक्षी और देवी देवताओं के सभी के संकट व उपद्रवों को दूर करने वाली है। इनके स्मरण और स्तुति से दुष्ट डाकिनी, शाकिनी

No. 34 Shri Manibhadra Stuti श्री माणिभद्र स्तुति

Shri Manibhadra Stuti श्री माणिभद्र स्तुति धारेलु सहु काम सिद्ध करवा, छो देव साचा तमे ने विघ्नो सघळा विनाश करवा, छो शक्तिशाळी तमे . सेवे जे चरणो खरा हृदयथी, तेने उपाधि नथी. एवा श्री मणिभद्र देव तमने वंदु घणा भावथी 1 देवा सुख समस्तजनने, जे छे सदा जागता, सेवाना करनारना पलकमां, कष्टो बधा कापता; सिद्धि

No. 33 Shri Chakreshvari Mata Stotra श्री चक्रेश्वरीदेवी स्तोत्रम्

यह श्रीचक्रेश्वरी देवी स्तोत्र (Shri Chakreshvari Mata Stotra) प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के शासन रक्षक देवी को समर्पित है। इस स्तोत्र में बताया है देवी चक्रेश्वरी अपने पराक्रम से शत्रुओं के घमंड को चूर करने वाली अत्यधिक बाहुबली और तीर्थ की वृद्धि करने वाली है। उपासक को सदैव सहायता करने वाली यहां श्रीचक्रेश्वरी देवी

No. 32 Shri Ghantakarna Mahavir Stotra श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र

श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र (Shri Ghantakarna Mahavir Stotra) के अंदर सभी प्रकार की व्याधियां अन्य भयानक संक्रामक रोगों के समय रक्षण करने की प्रार्थना की गई है। इस स्तोत्र के अनुसार यदि घंटाकर्ण वीर का मंत्र व यंत्र जिस स्थान पर लिखकर स्थापित किया जाता है, वहां वात पीत, कफ और अन्य रोगों से तथा

Shree Gruha Shanti Stotra

No. 31 Shree Gruha Shanti Stotra श्री गृह शांति स्तोत्र।

पाठक जीवों के सुख कल्याण और नवग्रह से जुड़ी बाधाओं को शांत  करता है। Shree Gruha Shanti Stotra में विविध परमात्माओं के चरणों में वंदना की गई है। एवं जिनेन्द्र भगवान, देवी देवताओं की विविध विधान से पुष्पगंध, धूप और नैवेद्य आदि के माध्यम से आराधना करने का विशिष्ट विधान बताया गया है। Shree Gruha

Shri Ambika Devi Mantra

No. 29 Shri Ambika Devi Mantra Yukt Ashtak Stotra

Shri Ambika Devi Mantra Yukt Ashtak Stotra श्री अंबिकादेवी मंत्र युक्ताष्टक स्तोत्र यह स्रोत Shri Ambika Devi Mantra Yukt Ashtak Stotra जैन धर्म के श्री अंबिका देवी का स्तोत्र है। यह विशिष्ट मंत्रों से  गर्भित स्तोत्र सभी प्रकार के दुख, विघ्न और उपद्रव को दूर करने की क्षमता रखता है। इस आठ अष्टक में यानि कि

Shatrunjay Laghu Kalp

No. 28 Shatrunjay Laghu Kalp शत्रुंजय लघुकल्प

Shatrunjay Laghu Kalp शत्रुंजय लघुकल्प अईमुत्तय केवलिणा, कहिअंसेत्तुंजतित्थमाहप्पं,  नारयरिसिस्स पुरओ, तं निसुणह भावओ भविआ.     1 सेत्तुंजे पुंडरिओ, सिद्धो मुणिकोडिपंचसंजुत्तो;  चित्तस्स पुण्णिमाए, सो भण्णइ तेण पुंडरिओ….        2 नमि विनमि रायाणो, सिद्धा कोडीहिं दोहिं साहूणं;  तह दविडवालिखिल्ला, निव्वुआ दस य कोडीओ.      3 पज्जुन्न संबपमुहा, अद्भुट्ट्ठाओ कुमारकोडीओ;  तह पंडवा वि पंच

Panch Sutra

No. 27 Panch Sutra पंच सूत्रस्य प्रथम सूत्र

Panch Sutra पंच सूत्रस्य प्रथम सूत्र   (चिरन्तनाचार्यविरचितं) पाप प्रतिघात गुण बीजाधान सूत्रम् णमो वीअरागाणं सव्वण्णूणं देविंदपूइयाणं जहट्ट्ठिअवत्थु-वाईणं तेलुक्कगुरूणं अरुहंताणं भगवंताणं. जे एवमाइक्खंति-इह खलु अणाई जीवे, अणाइजीवस्स भवे अणाइ-कम्मसंजोग-निवत्तिए, दुक्खरूवे, दुक्खफले, दुक्खाणुबंध…१ एअस्स णं वुच्छित्ती सुद्धधम्माओ, सुद्धधम्मसंपत्ती पावकम्मविगमाओ, पावकम्मविगमो तहाभवत्ताइभावओ. तस्स पुण विवागसाहणाणि १ चउसरणगमणं २ दुक्कडगरिहा ३ सुकडाण सेवणं, अओ कायव्वमिणं होउकामेण सया सुप्पणिहाणं

Shree Shantidhara Path

No.26 Shree Shantidhara Path

सर्वकार्यसिद्धिदायक श्रीशान्तिधारा पाठः Shree Shantidhara Path ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं वं मं हं सं तं वंवं मंमं हंहं संसं तंतं पंपं डंडं म्वीं म्वीं क्ष्वीं क्ष्वीं द्राँ द्राँ द्रीं द्रीं द्रावय द्रावय नमोऽर्हते भगवते श्रीमते ॐ ह्रीं क्रों मम पापं खण्डय खंडय हन हन दह दह पच पच पाचय पाचय सिद्धिं कुरु कुरु.

Omkara Vidya Stavan

No. 25 Omkara Vidya Stavan ॐकार विद्या स्तव ज्ञानी बनाने हेतु मंत्र

Omkara Vidya Stavan ॐकार विद्या स्तवन यह ऊँकार विद्या स्तवन (Omkara Vidya Stavan) का पाठ करने से मनुष्य को स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र का जाप अज्ञानी को ज्ञानी बनाता है।अहंकार को मुक्त बनाकर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि को प्रदान करवाता है। प्रणवस्त्वं ! परब्रह्मन् ! लोकनाथ ! जिनेश्वर

Shodasnam Saraswati Stotra

No. 24 Shodasnam Saraswati Stotra षोडशनाम सरस्वती स्तोत्र

Shodasnam Saraswati Stotra  षोडशनाम सरस्वती स्तोत्र नमस्ते शारदे देवि !, काश्मीरपुरवासिनि !;  त्वामहं प्रार्थये मातः, विद्यादानं प्रदेहि मे ||1|| प्रथमं भारतीनाम, द्वितीयं च सरस्वती;  तृतीयं शारदादेवी, चतुर्थं हंसगामिनी ||2|| पंचमं विदुषां माता, षष्ठं वागीश्वरी तथा;  कुमारी सप्तमं प्रोक्तं, अष्टमं ब्रह्मचारिणी ||3|| नवमं त्रिपुरा देवी, दशमं ब्राह्मिणी तथा;  एकादशं च ब्रह्माणि, द्वादशं ब्रह्मवादिनी ||4|| वाणी त्रयोदशं

Sarasvati Stotra

No. 23 Sarasvati Stotra सरस्वती स्तोत्र ज्ञान की प्राप्ति और बुद्धि तीव्र करने हेतु मंत्र जाप

Sarasvati Stotra सरस्वती स्तोत्र (सिद्धसारस्वताचार्य श्रीमद् बप्पभट्टिसूरि कृत) कलमरालविहङ्गमवाहना, सितदुकूलविभूषणलेपना; प्रणतभूमिरुहामृतसारिणी, प्रवरदेहविभाभरधारिणी ||1|| अमृतपूर्णकमण्डलुहारिणी, त्रिदशदानवमानवसेविता; भगवती परमैव सरस्वती मम पुनातु सदा नयनाम्बुजम्.||2|| जिनपतिप्रथिताखिलवाड्मयी, गणधराननमण्डपनर्तकी; गुरुमुखाम्बुजखेलनहंसिका, विजयते जगति श्रुतदेवता.||3|| अमृतदीधितिबिम्बसमाननां, त्रिजगती जननिर्मितमाननाम्; नवरसामृतवीचिसरस्वतीं, प्रमुदितः प्रणमामि सरस्वतीम्.||4|| विततकेतकपत्रविलोचने! विहितसंसृतिदुष्कृतमोचने !; धवलपक्षविहङ्गम् लाञ्छिते; जय सरस्वति ! पूरितवाञ्छिते !||5|| भवदनुग्रहलेशतरङ्गिता-स्तदुचितं प्रवदन्ति विपश्चितः;  नृपसभासु यतः कमलाबला, कुचकलाललनानिवितन्वते ||6|| गतधना अपि हि

Namiuna Stotra

No. 22 Namiuna Stotra नमिऊण स्तोत्र पार्श्वनाथ वंदना एवम् स्मरण

नमिऊण स्तोत्र Namiuna Stotra नमिऊण पणय-सुर-गण, चूडा-मणि-किरण-रंजिअं मुणिणो; चलण-जुअलं महा-भय-पणासणं संथवं वुच्छं.||1|| सडिय-कर-चरण-नह-मुह-निबुड्ड-नासा विवन्न-लायन्ना; कुट्ठ-महारोगानल-फुलिंगनिद्दड्ढ-सव्वंगा.||2|| ते तुह चलणाराहण सलिलंजलि सेय वुड्ढियच्छाया; वण-दव-दड्ढा गिरि-पायवव्व, पत्ता पुणो लच्छिं.||3|| दुव्वाय-खुभिय-जल-निहि-उब्भङ-कल्लोल-भीसणारावे; संभंत-भय-विसंठुल-निज्झामय-मुक्कवावारे.||4|| अ-विदलिअ-जाण-वत्ता, खणेण पावंति इच्छिअं कूलं; पास जिण-चलण-जुअलं, निच्चं चिअ जे नमंति नरा.||5|| खर-पवणुद्धअ-वण-दव-जालावलि-मिलिय-सयल-दुम-गहणे; डज्झंत-मुद्ध-मय-वहु-भीसणरव-भीसणम्मि वणे.||6|| जग-गुरुणो कम-जुअलं, निव्वाविअ-सयलति-हुअणाभोअं; जे संभरंति मणुआ, न कुणइ जलणो भयं तेसिं.||7|| विलसंत-भोग-भीसण-फुरिया-ऽरुण

Shree Gautam Astak

No. 11 Shree Gautam Astak श्री गौतम अष्टक

  Shree Gautam Astak श्री गौतम अष्टक श्रीइंद्रभूर्ति वसुभूतिपुत्रं, पृथ्वीभवं गौतमगोत्ररत्नम्; स्तुवन्ति देवाः सुरमानवेन्द्राः स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे १ श्रीवर्द्धमानात् त्रिपदीमवाप्य, मुहूर्तमात्रेण कृतानि येन, अंगानि पूर्वाणि चतुर्दशापि, स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे……२ श्रीवीरनाथेन पुरा प्रणीतं, मंत्रं महानंदसुखाय यस्यः ध्यायन्त्यमी सूरिवराः समग्राः, स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे .. ३ यस्याभिधानं मुनयोऽपि सर्वे, गृह्णन्ति भिक्षाभ्रमणस्य काले;

Kalyan Mandir Stotra

No. 20 Kalyan Mandir Stotra कल्याण मंदिर स्तोत्र 

कल्याण मंदिर स्तोत्र  Kalyan Mandir Stotra कल्याण-मंदिरमुदारमवद्य भेदि,  भीताभय-प्रदमनिन्दितमध्रि-पद्मम्; संसार-सागर-निमज्जदशेष-जन्तु- पोतायमानमभिनम्य जिनेश्वरस्य. ……..१ यस्य स्वयं सुरगुरुर्गरिमाम्बुराशेः,  स्तोत्रं सुविस्तृतमतिर्न विभुर्विधातुम्;  तीर्थेश्वरस्य कमठ-स्मय-धूमकेतो,  स्तस्याहमेष क्लि संस्तवनं करिष्ये (युग्मम्). २  सामान्यतोऽपि तव वर्णयितुं स्वरूप- मस्मादृशाः कथमधीश ! भवन्त्यधीशाः ?;  धृष्टोऽपि कौशिक-शिशुर्यदिवा दिवान्धो,  रूपं प्ररूपयति किं किल घर्मरश्मेः?. …….३ मोहक्षयादनुभवन्नपि नाथ! र्मत्यो, नूनं गुणान् गणयितुं न तव क्षमेत;  कल्पान्त-वान्त-पयसः

Mahamantragarbhita Shri Kalikund Parshwanath Stotram

No. 18 Mahamantragarbhita Shri Kalikund Parshwanath Stotram – महामंत्रगर्भित श्री कलिकुंड पार्श्वनाथ स्तोत्रम् पाठ और लाभ

महामंत्रगर्भित श्री कलिकुंड पार्श्वनाथ स्तोत्रम्  Mahamantragarbhita Shri Kalikund Parshwanath Stotra : महामंत्रगर्भित श्री कलिकुंड पार्श्वनाथ स्तोत्रम् इस स्तोत्र का पाठ भक्त यदि नित्य करता है तो वह दीर्घायु,आरोग्य, ऐश्वर्य,एवं इष्ट कामना की सिद्धि प्राप्त करता है। यह अत्यंत प्रभाव विविध बिजाक्षरों से भरपूर स्तोत्र है। इस स्रोत के प्रभाव से भयंकर शत्रुओं के भय,डाकिनी-शाकिनी के उपद्रव,प्रबल

Hrimkar Vidhya Stavan

No. 17 Hrimkar Vidhya Stavan हीँकार विद्या स्तवन

 हीँकार विद्या स्तवन (Hrimkar Vidhya Stavan) सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला स्तोत्र बताया। यदि गुरुगम से प्राप्त करके इसे उपांशु जाप करें तो यह अद्भुत फल देता है।हीँकार से विद्या प्राप्ति, लक्ष्मीप्राप्ति, शत्रु भयनाश, सुख,समृद्धि और अष्ट सिद्धि इत्यादि की प्राप्ति होती है। यह अत्यंत प्रभाव बीजाक्षर युक्त महास्तोत्र है। इसे हीँकार विद्या स्तवन

Shree Shantinath Stotra

015 Shree Shantinath Stotra श्री शान्तिनाथ स्तोत्र

प्रस्तुत श्री शांतिनाथ स्तोत्र (Shree Shantinath Stotra) में 16 विद्या देवी 64 इंद्र जया विजया विद्यादेवियों से जीवन में शांति तुष्टि और शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। श्री शांतिनाथ भगवान के इस स्तोत्र के पाठ से ज्वर भगंदर,खांसी,दमा,अन्य भयंकर बीमारियाँ या व्याधियां नहीं आती है। भय और उपद्रव का निवारण होता है। दुष्ट

Panchashashti Stotra

No.014 Panchashashti Stotra पंचषष्टि स्तोत्र

श्री जयतिलक सूरी महाराज के शिष्य द्वारा यह पंचषष्ठि स्तोत्र (Panchashashti Stotra)की रचना की गई है।श्रद्धा और भक्ति के साथ जो भाग्यशाली इस यंत्र की पूजा करता है उसके घर में भूत प्रेत और पिशाच आदि का कोई भी भय नहीं रहता है। यह एक अत्यंत प्रभावशाली गुप्त मन्त्रों से भरा हुआ पैसठिया यंत्र है

Mantradhiraja Parshva Stotra

No. 9 Mantradhiraja Parshva Stotra – श्री मंत्राधिराज पार्श्वस्तोत्र

  Mantradhiraja Parshva Stotra : श्री मंत्राधिराज पार्श्वस्तोत्र इस स्रोत में पार्श्वनाथ परमात्मा के एक सौ आठ नाम से स्तवना की गई है। त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं, नित्यं प्राप्नोति स श्रियम् मतलब जो व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ त्रिकाल यानी कि सुबह दोपहर शाम पूर्ण श्रद्धा के साथ करता है।उसे निश्चित तौर से लक्ष्मी सुख समृद्धि

Mantradhiraja Parshva Stotra

No. 8 Shri Parshvanath Vishahar Stotram श्री पार्श्वनाथ विषहर स्तोत्र

Shri Parshvanath Vishahar Stotram : यह पार्श्वनाथ विषहर स्तोत्र हर एक प्रकार के विष को दूर करने वाला अत्यंत प्रभावी स्रोत है।  यदि किसी को भी बुखार आया हो तो इस स्रोत का शुद्धिपूर्वक त्रिकाल 21 बार जाप करने से भयंकर में भयंकर बुखार भी नाश हो जाता है। कान की पीड़ा बालक संबंधी पीड़ा