No.1 Atmaraksha Navkar Mantra | आत्मरक्षा नवकार मंत्र 

Atmaraksha Navkar Mantra :आत्मरक्षा नवकार मंत्र। इस स्तोत्र के प्रभाव से साधक के शरीर की रक्षा होती है। यह स्तोत्र सभी प्रकार की आने वाली आधि व्याधि से सुरक्षा प्रदान करता है। प्रतिदिन इसका पाठ करने से जीवन मे मंगल ही मंगल होता है।  

Atmaraksha Navkar Mantra – आत्मरक्षा नवकार मंत्र

ॐ परमेष्ठि नमस्कारं, सारं नवपदात्मकम;

आत्मरक्षाकरं वज्र-पंजराभं स्मराम्यहम् । …1

ॐ णमो अरिहंताणं, शिरस्कंसिरसि स्थितम;

ॐ णमो सिद्धाणं, मूखे मूखपटंवरम् …… 2

ॐ णमो आयरियाणं , अंगरक्षातिशायिनी;

ॐ णमो उवज्झायाणं, आयुधंहस्तयोर्दृढम् ।…..3

ॐ णमो लोएसव्वसाहूणं, मोचके पादयोः शुभे;

एसो पंच णमुक्कारो, शिला वज्रमयी तले।…..4

सव्वपावप्पणासणो वप्रो वज्रमयो बहिः

मंगलाणं च सव्वेसिं. खादिरांगार-खातिका।…..5

महाप्रभावा रक्षेयं, क्षुद्रोपद्रव नाशिनी:

परमेष्ठि-पदोद्भूता कथिता पूर्वसूरिभिः…..6

यश्चैवं कुरूते रक्षां,परमेष्ठिपदैः सदा;

तस्य न स्याद भय व्याधि-राधि-श्चाडपि कदाचन …….7

Atmaraksha Navkar Mantra – आत्मरक्षा नवकार मंत्र

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