No. 33 Shri Chakreshvari Mata Stotra श्री चक्रेश्वरीदेवी स्तोत्रम्

यह श्रीचक्रेश्वरी देवी स्तोत्र (Shri Chakreshvari Mata Stotra) प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के शासन रक्षक देवी को समर्पित है। इस स्तोत्र में बताया है देवी चक्रेश्वरी अपने पराक्रम से शत्रुओं के घमंड को चूर करने वाली अत्यधिक बाहुबली और तीर्थ की वृद्धि करने वाली है। उपासक को सदैव सहायता करने वाली यहां श्रीचक्रेश्वरी देवी का महाप्रभावित स्रोत है

Shri Chakreshvari Mata Stotra श्री चक्रेश्वरीदेवी स्तोत्रम्

 

जय श्रीमद्युगादीशपदपद्ममधुव्रते । 

सुरेन्द्रादिसुरश्रेणिश्लाध्यसद्गुणविक्रमे.        १

जय श्रीदेवदेवेन्द्रप्रशस्यगुणविक्रमे ।

श्रीयुगादिजगन्नाथक्रमाम्भोजमधुव्रते.            २

चक्रवित्रासिताशेषरिपुचक्रपराक्रमे । 

चक्रेश्वरि सूरिवृन्दवन्द्यमानक्रमाम्बुजे……..    ३

तीर्थप्रवृत्तिहेतुश्रीसूरिमन्त्रस्य पञ्चमे । 

मन्त्रराजाभिधे स्थाने सुप्रतिष्ठे महाबले.         ४

वरदेष्वरिपाशांकितापसव्यचतुर्भुजे । 

सत्त्वाह्लादिनी हे चक्रांकुशसव्यचतुःशये..      ५

सुपर्णवाहने श्रीमद्‌गौतमोपास्तिलालसे। 

स्वर्णवर्णे सदोद्भासिसाराल‌ङ्कारराजिते.         ६

सूरिभिः सततं ध्येये तेषामिष्टप्रसाधिके । 

सर्वविघ्नावलीघातनिघ्ने रक्षापरे सदा……        ७

चतुर्विधस्य संघस्य सर्वोपद्रवनाशिनि । 

समाधानं सुबोधिं च सदा देहीष्टदे मम….       ८

स्तूयमान महानेकमुनिसुन्दरसंस्तवैः । 

स्तुते मयाप्यभीष्टाप्तिं चक्रेश्वरि विधेहि मे.       ९

।। इति चक्रेश्वरी देवी स्तोत्रम् ।।

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