नमिऊण स्तोत्र Namiuna Stotra
नमिऊण पणय-सुर-गण, चूडा-मणि-किरण-रंजिअं मुणिणो;
चलण-जुअलं महा-भय-पणासणं संथवं वुच्छं.||1||
सडिय-कर-चरण-नह-मुह-निबुड्ड-नासा विवन्न-लायन्ना;
कुट्ठ-महारोगानल-फुलिंगनिद्दड्ढ-सव्वंगा.||2||
ते तुह चलणाराहण सलिलंजलि सेय वुड्ढियच्छाया;
वण-दव-दड्ढा गिरि-पायवव्व, पत्ता पुणो लच्छिं.||3||
दुव्वाय-खुभिय-जल-निहि-उब्भङ-कल्लोल-भीसणारावे;
संभंत-भय-विसंठुल-निज्झामय-मुक्कवावारे.||4||
अ-विदलिअ-जाण-वत्ता, खणेण पावंति इच्छिअं कूलं;
पास जिण-चलण-जुअलं, निच्चं चिअ जे नमंति नरा.||5||
खर-पवणुद्धअ-वण-दव-जालावलि-मिलिय-सयल-दुम-गहणे;
डज्झंत-मुद्ध-मय-वहु-भीसणरव-भीसणम्मि वणे.||6||
जग-गुरुणो कम-जुअलं, निव्वाविअ-सयलति-हुअणाभोअं;
जे संभरंति मणुआ, न कुणइ जलणो भयं तेसिं.||7||
विलसंत-भोग-भीसण-फुरिया-ऽरुण नयण-तरल-जीहालं;
उग्ग-भुअंगं नवजलय-सत्थहं भीसणाऽऽयारं.||8||
मन्नंति कीड-सरिसं, दूर-परिच्छुढ-विसम-विसवेगा;
तुह नामक्खर-फुड-सिद्ध-मंत-गुरुआ नरा लोए.||9||
अडवीसु भिल्ल-तक्कर, पुलिंद सहुलसद्द-भीमासुः
भय-विहुर-वुन्न-कायर-उल्लूरिअ-पहिअ-सत्थासु.||10||
-विलुत्त-विहव-सारा, तुह नाह! पणाम-मत्तवावारा;
ववगय-विग्धा सिग्धं, पत्ता हिय-इच्छियं ठाणं.||11||
पज्जलिआनल-नयणं, दूर-वियारिय-मुहं महा-कायं;
नह-कुलिस-घाय-विअलिअ-गइंद-कुंभत्थलाऽऽभोअं.||12||
पणय-ससंभम-पत्थिव-नह-मणि-माणिक्क-पडिअ-पडिमस्स;
तुह वयण-पहरण-धरा, सीहं कुद्धंपि न गणंति.||13||
ससि-धवल-दंत-मूसलं, दीह-करुल्लाल-वुड्ढि-उच्छाहं;
महु-पिंग-नयणजुअलं, स-सलिल-नवजल-हराऽऽरावं.||14||
भीमं महा-गइंदं, अच्चा ऽऽसन्नं पि ते नवि गणंति;
जे तुम्ह चलण-जुअलं, मुणि-वई! तुंगं समल्लीणा.||15||
समरम्मि तिक्ख-खग्गा-ऽभिग्धाय पविद्ध-उद्धय-कबंधे;
कुंत-विणिभिन्न-करि-कलह-मुक्क-सिक्कार-पउरंमि.||16||
निज्जिय दप्पुद्धर-रिउ-नरिंद-निवहा भडा जसं धवलं;
पावंति पाव-पसमिण! पास-जिण! तुह प्पभावेण.||17||
रोग-जल-जलण-विस-हर, चोराऽरि-मइंद-गय-रण-भयाइं;
पास-जिण-नाम-संकित्तणेण पसमंति सव्वाई.||18||
एवं महा-भय-हरं, पास-जिणिंदस्स संथवमुआरं;
भविय-जणा-ऽऽणंद-यरं, कल्लाण-परंपर-निहाणं.||19||
राय-भय-जक्ख-रक्खस-कुसुमिण-दुस्सउण-रिक्ख-पीडासु;
संझासु दोसु पंथे, उवसग्गे तह य रयणीसु.||20||
जो पढइ जो अ निसुणई, ताणं कइणो य माणतुंगस्स;
पासो पावं पसमेउ, सयल भुवणऽच्चिअ चलणो.||21||
उवसग्गंते कमठा-ऽसुरम्मि, झाणाओ जो न संचलिओ;
सुर नर-किन्नर-जुवइहिं, संथुओ जयउ पास जिणो.||22||
एअस्स मज्झयारे, अट्ठारस अक्खरेहिं जो मंतो;
जो जाणई सो झायई, परम पयत्थं फुडं पासं.||23||
पासह समरण जो कुणइ, संतुट्ठे हियएण;
अद्भुत्तर सय वाहि भय, नासइ तस्स दूरेण.||24||
||नमिऊण स्तोत्र Namiuna Stotra||
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