Uvasaggaharam Stotra : श्री भद्रबाहु स्वामी रचित यह महाप्रभाविक उवसग्गहरम् स्तोत्र है। इस स्तोत्र में 23 वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ प्रभु की स्तवना आती है।उपसर्गों का नाश करने वाला होने से इस स्तोत्र का नाम उवसग्गहरम् रखा गया है। इस स्तोत्र के स्मरण से महामारी जैसी भयंकर बीमारी दूर हुई है। यह दो कैटेगरीज में उपलब्ध है।
छोटा और बड़ा.छोटा मात्र 5 श्लोक प्रमाण हैं, और बड़ा 27 श्लोक प्रमाण आता है। इस में परमात्मा श्री पार्श्वनाथ को श्रद्धा पूर्वक प्रणाम करते हुए प्रार्थना कि गयी है। इस के स्मरण से मन में शांति और साता का अनुभव होता है। साथ-साथ शारीरिक व्याधि भी दूर होती है। कई लोग इस स्तोत्र की माला भी गिनते है।इस स्तोत्र के नियमित जाप से चमत्कारिक रूप से संकटों का नाश होता है।
। । उवसग्गहरं स्तोत्र Uvasaggaharam Stotra। ।
उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्म-घण-मुक्कं;
विसहर-विस-निन्नासं, मंगल-कल्लाण-आवासं ……… १
विसहर-फुलिंग-मंतं, कंठे धारेई जो सया मणुओ;
तस्स गह-रोग-मारी, दुट्ठजरा जंति उवसामं ………….२
चिट्ठउ दूरे मंतो, तुज्झ पणामो वि बहुफलो होई;
नरतिरिएसु वि जीवा, पावंति न दुक्ख दोगच्चं ……..३
तुह समत्ते लद्धे, चिंतामणि-कप्पपायवब्भहिए;
पावंति अविग्घेणं, जीवा अयरामरं ठाणं ………….४
इय संथुओ महायस ! भत्तिब्भर-निब्भरेण-हियएण;
ता देव दिज्ज बोहिं, भवे भवे पास जिणचंद ! ……….५
। । उवसग्गहरं स्तोत्र Uvasaggaharam Stotra। ।
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