श्री त्रिभुवन स्वामिनी देवी स्तोत्र (Shri Tribhuvana Swamini Devi Stotram) जो सूरी मंत्र की मुख्य अधिष्ठायीका है, वैसे त्रिभुवन स्वामिनी देवी के चरणों में यह स्रोत समर्पित है।
यह देवी मनुष्य, पशु पक्षी और देवी देवताओं के सभी के संकट व उपद्रवों को दूर करने वाली है। इनके स्मरण और स्तुति से दुष्ट डाकिनी, शाकिनी भूत प्रेत, पिशाच तथा विभिन्न ग्रहों के अशुभ प्रभाव संपूर्ण रूप से नष्ट होते हैं। इस स्तोत्र का जाप करने से साधक अपने जीवन में सुख, शांति, मानसिक समाधान और बोधि बीज की प्राप्ति तथा इस फल की प्राप्ति करता है।
Shri Tribhuvana Swamini Devi Stotram श्री त्रिभुवनस्वामिनी देवी स्तोत्रम्
जय श्रीगणभृन्मन्त्रविद्यास्थानप्रतिष्ठिते ।
देवि त्रिभुवनस्वामिन्यनन्तमहिमद्युते. 1
जिनराजपदाम्भोजविलासवरलानिभे ।
गौतमस्वामि पद्भक्ते सक्ते भक्तालिपालने. 2
महापराक्रमोल्लासि सहस्रभुजराजिते ।
मानुषोत्तरशैलेन्द्रनिवासिनि जयोत्तमे. 3
महादेवि सुरीवृन्दवन्द्यमानक्रमाम्बुजे ।
सुरासुरनराधीशप्रशस्यगुणवैभवे. 4
शाकिनी-डाकिनी-भूत-प्रेतादिग्रहनाशिनि ।
सर्वद्वेषिगणोच्चाटन्यमेयबलशालिनि 5
नृतिर्यक्-देवताद्युत्थक्षुद्रोपद्रववारिणि ।
संस्मृतेरपि सर्वेष्टसुखकल्याणकारिणि …. 6
सर्वसूरिगुणस्तुत्ये द्विध (धा) वैरिजयश्रियम् ।
देहि मे शुद्धबोधिं च समाधानं च सर्वतः …. 7
स्तूयमाने महानेकमुनिसुन्दरसंस्तवैः ।
स्तुते मयापि मेऽभीष्टं देहि त्रिभुवनेश्वरि… 8
।। इति श्री त्रिभुवन स्वामिनीदेवी स्तुतिः ।।
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