अट्टे मट्टे आदि परम प्रभाविक मंत्र से पूर्ण श्री जीरावल्ला पार्श्वनाथ स्तोत्र (Shree Jirawala Parshwanath Stotra-) की रचना महान मंत्रवेत्ता श्री मेरुतुंग सूरीजी महाराज [अचलगच्छाचार्य] ने की थी इस स्तोत्र के अनेक प्रभाव है। इसमे जैनधर्म के 23 वें तीर्थंकर श्री जीरावल्ला पार्श्वनाथ भगवानकी विशेष तोर से स्तवना की गई है इस स्तोत्र की पूर्ण भक्ति भाव से त्रिकाल पाठ करने से भूत-प्रेत आदि की बाधा भी नष्ट होती है।
श्री जीरावल्ला पार्श्वनाथ स्तोत्र Shree Jirawala Parshwanath Stotra
ॐ नमो देवदेवाय, नित्यं भगवतेऽर्हते,
श्रीमते पार्श्वनाथाय, सर्वकल्याणकारिणे ……….१
ह्रींरूपाय धरणेन्द्रः, पद्मावत्यर्चितांघ्रये,
शुद्धातिशयकोटिभिः, सहिताय महात्मने ………२
अट्टेमट्टे पुरो दृष्ट, विघट्टे वर्णपंक्तिवत्,
दुष्टान् प्रेतपिशाचादीन्. प्रणाशयति तेऽभिधा …..३
स्तंभय स्तंभयस्वाहा, शनकोटि नमस्कृतः,
अधिमथ कर्मणां दूरा दापतंतीर्विडंबना…….४
नाभिदेशोद्भवन्नाले ब्रह्मरंध्रप्रतिष्ठिते,
ध्यातमष्टदले पद्मे, तत्त्वमेतत्फलप्रदम् ………..५
तत्त्वमत्र चतुर्वर्णी, चतुर्वर्णविमिश्रिता;
पंचवर्ण क्रमध्याता, सर्वकार्यकरी भवेत् ………६
क्षिप ॐ स्वाहेति वर्णैः, कृतः पंचांगरक्षणः
योऽभिध्यायेदिदं तत्त्वं वश्यास्तस्याखिलश्रियः …७
पुरुषं बाधते बाढं तावत्कलेश परंपरा,
यावन्न मंत्रराजोयं, हृदि जागर्ति मूर्तिमान् ….….८
व्याधिबंधवधव्यालानलांभः संभवं भयं;
क्षयं प्रयाति श्रीपार्श्वनामस्मरणमात्रतः ………..९
यथा नादमयो योगी, तथा चेत्तन्मयो भवेत्;
तथा न दुष्करं किंचित्, कथ्यतेऽनुभवादिदम् ….१०
इति श्रीजीरिकापल्ली स्वामी पार्श्वजिनः स्तुतः
श्रीमेरुतुंगसूरेः स्तात्, सर्वसिद्धि प्रदायकः ….…११
जीरापल्ली प्रभुं पार्श्व, पार्श्वयक्षेण सेवितम्,
अर्चितं धरणेन्द्रेण, पद्मावत्या प्रपूजितम् ………१२
सर्वमंत्रमयं सर्व-कार्यसिद्धिकरं परम्;
ध्यायामि हृदयांभोजे, भूतप्रेतप्रणाशकम् ………१३
श्रीमेरुतुंगसूरीन्द्रः, श्रीमत्पार्श्वप्रभोः पुरः;
ध्यानस्थितं हृदि ध्यायन्. सर्वसिद्धिं लभेद् ध्रुवम् ..१४
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