No. 55  दीठी हो प्रभु दीठी जगगुरु तुज रे…..deethi ho prabhu deethi jagaguru tuj re

 दीठी हो प्रभु दीठी जगगुरु तुज रे…..

deethi ho prabhu deethi jagaguru tuj re….

(राग : तुं मने भगवान…. आंखडी मारी… प्रीतलडी बंधाणीरि जिनराज…/ अपूर्व अवसर…)

दीठी हो प्रभु दीठी जगगुरु तुज रे, 

मूरति हो प्रभु मूरति मोहनवेलडी जी; 

मीठी हो प्रभु मीठी ताहरी वाण रे, 

लागे हो प्रभु लागे जैसी शेलडीजी. ॥१॥

जाणं हो प्रभु जाणं जन्म कयत्थ रे, 

जो हुं हो प्रभु जो हुं तुम साथे मिल्योजी; 

सुरमणि हो प्रभु सुरमणि पाम्यो हत्थ रे, 

आंगणे हो प्रभु आंगणे मुज सुरतरु फल्योजी. ॥२॥

जाग्या हो प्रभु जाग्या पुण्य अंकुर रे, 

मांग्या हो प्रभु मुह मांग्या पासा ढल्याजी; 

वूठा हो प्रभु वूठा अमीरस मेह रे, 

नाठा हो प्रभु नाठा अशुभ शुभ दिन वल्याजी. ।।३।।

भूख्यां हो प्रभु भूख्यां मल्यां घृतपूर रे, 

तरस्यां हो प्रभु तरस्यां दिव्य उदक मिल्यांजी; 

थाक्यां हो प्रभु थाक्यां मण्यां सुखपाल रे, 

चाहता हो प्रभु चाहता सज्जन हेजे हल्याजी. ॥४॥ 

दीवो हो प्रभु दीवो निशा वन गेह रे, 

शाखी हो प्रभु शाखी थळे जळे नौ मिलीजी; 

कलियुगे हो प्रभु कलियुगे दुल्लहो तुज रे, 

दरिशण हो प्रभु दरिशण लह्यं आशा फणीजी. ।।५।।

वाचक हो प्रभु वाचक ‘यश’ तुम दास रे, 

विनवे हो प्रभु विनवे अभिनंदन सुणोजी; 

कदीये हो प्रभु कदीये म देशो छेह रे, 

देजो हो प्रभु देजो सुख दरिशण तणोजी. ॥६॥

अन्य जैन स्तवन और स्तोत्र 

जगजीवन जगवालहो… 

अजित जिणंदशुं प्रीतडी…

संभव जिनवर विनंती…

नमस्कारमंत्राधिराजस्तोत्रम् 

श्री गौतमाष्टक छंद

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