Shree Gautam Astak

No. 11 Shree Gautam Astak श्री गौतम अष्टक

  Shree Gautam Astak श्री गौतम अष्टक श्रीइंद्रभूर्ति वसुभूतिपुत्रं, पृथ्वीभवं गौतमगोत्ररत्नम्; स्तुवन्ति देवाः सुरमानवेन्द्राः स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे १ श्रीवर्द्धमानात् त्रिपदीमवाप्य, मुहूर्तमात्रेण कृतानि येन, अंगानि पूर्वाणि चतुर्दशापि, स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे……२ श्रीवीरनाथेन पुरा प्रणीतं, मंत्रं महानंदसुखाय यस्यः ध्यायन्त्यमी सूरिवराः समग्राः, स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे .. ३ यस्याभिधानं मुनयोऽपि सर्वे, गृह्णन्ति भिक्षाभ्रमणस्य काले;

Shree Chandraprabha Vidhya Stavah

No. 21 Shree Chandraprabha Vidhya Stavah श्री चंद्रप्रभ विद्या स्तवः

श्री चंद्रप्रभ विद्या स्तवः Shree Chandraprabha Vidhya Stavah ॐ चंद्रप्रभ। प्रभाधीश। चंद्रशेखरचंद्रभूः ।  चंद्रलक्ष्माङ्क। चंद्राङ्ग। चंद्रबीज । नमोस्तुते …..१ ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री चंद्रप्रभ ! ह्रीं श्रीं कुरु कुरु स्वाहा।  इष्टसिद्धि-महासिद्धितुष्टिपुष्टिकरो भव…२ द्वादशसहस्रजप्तो वांछितार्थ फलप्रदः।  महित्वा त्रिसंध्यं जापो, सर्वाधिव्याधिनाशनः ……३ सुरासुरेन्द्रमहितः, श्री पांडवनृपस्तुतः  श्री चंद्रप्रभतीर्थेशः, श्रियं चंद्रोज्जवलां कुरु…..४ श्री चंद्रप्रभविद्येयं, स्मृता सद्यं फला मता।

Kalyan Mandir Stotra

No. 20 Kalyan Mandir Stotra कल्याण मंदिर स्तोत्र 

कल्याण मंदिर स्तोत्र  Kalyan Mandir Stotra कल्याण-मंदिरमुदारमवद्य भेदि,  भीताभय-प्रदमनिन्दितमध्रि-पद्मम्; संसार-सागर-निमज्जदशेष-जन्तु- पोतायमानमभिनम्य जिनेश्वरस्य. ……..१ यस्य स्वयं सुरगुरुर्गरिमाम्बुराशेः,  स्तोत्रं सुविस्तृतमतिर्न विभुर्विधातुम्;  तीर्थेश्वरस्य कमठ-स्मय-धूमकेतो,  स्तस्याहमेष क्लि संस्तवनं करिष्ये (युग्मम्). २  सामान्यतोऽपि तव वर्णयितुं स्वरूप- मस्मादृशाः कथमधीश ! भवन्त्यधीशाः ?;  धृष्टोऽपि कौशिक-शिशुर्यदिवा दिवान्धो,  रूपं प्ररूपयति किं किल घर्मरश्मेः?. …….३ मोहक्षयादनुभवन्नपि नाथ! र्मत्यो, नूनं गुणान् गणयितुं न तव क्षमेत;  कल्पान्त-वान्त-पयसः

Shri Chintamani Parshwanath Stotra

No. 19 Shri Chintamani Parshwanath Stotra श्री चिंतामणिपार्श्वनाथ स्तोत्र

Shri Chintamani Parshwanath Stotra : श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ स्तोत्र में ओमकार और ह्रींकार से युक्त श्री चिंतामणि मंत्र बताया गया है। इसके प्रभाव से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस स्तवन से साधक को मनोवांछित फल ऐश्वर्य सभी प्रकार के पुरुषार्थ की प्राप्ति करने में सहायक यह स्तोत्र चिंतामणि समान है। इस स्तोत्र

Mahamantragarbhita Shri Kalikund Parshwanath Stotram

No. 18 Mahamantragarbhita Shri Kalikund Parshwanath Stotram – महामंत्रगर्भित श्री कलिकुंड पार्श्वनाथ स्तोत्रम् पाठ और लाभ

महामंत्रगर्भित श्री कलिकुंड पार्श्वनाथ स्तोत्रम्  Mahamantragarbhita Shri Kalikund Parshwanath Stotra : महामंत्रगर्भित श्री कलिकुंड पार्श्वनाथ स्तोत्रम् इस स्तोत्र का पाठ भक्त यदि नित्य करता है तो वह दीर्घायु,आरोग्य, ऐश्वर्य,एवं इष्ट कामना की सिद्धि प्राप्त करता है। यह अत्यंत प्रभाव विविध बिजाक्षरों से भरपूर स्तोत्र है। इस स्रोत के प्रभाव से भयंकर शत्रुओं के भय,डाकिनी-शाकिनी के उपद्रव,प्रबल

Hrimkar Vidhya Stavan

No. 17 Hrimkar Vidhya Stavan हीँकार विद्या स्तवन

 हीँकार विद्या स्तवन (Hrimkar Vidhya Stavan) सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला स्तोत्र बताया। यदि गुरुगम से प्राप्त करके इसे उपांशु जाप करें तो यह अद्भुत फल देता है।हीँकार से विद्या प्राप्ति, लक्ष्मीप्राप्ति, शत्रु भयनाश, सुख,समृद्धि और अष्ट सिद्धि इत्यादि की प्राप्ति होती है। यह अत्यंत प्रभाव बीजाक्षर युक्त महास्तोत्र है। इसे हीँकार विद्या स्तवन

Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra

016 Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra श्री बृहद् उवसग्गहरं स्तोत्र

श्री बृहद् उवसग्गहरं स्तोत्र यह सभी प्रकार के उपसर्ग को दूर करने वाला महाप्रभविक श्री बृहद् उवसग्गहरम् स्तोत्र (Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra )है। यह स्तोत्र दो विभाग में विभाजित है। बृहद और लघु बृहद् 27 श्लोक प्रमाण है,एवं लघु 5 श्लोक प्रमाण है। श्लोक नम्बर 15 और 16 ने कहा है श्री पार्श्वनाथ भगवान के

Panchashashti Stotra

No.014 Panchashashti Stotra पंचषष्टि स्तोत्र

श्री जयतिलक सूरी महाराज के शिष्य द्वारा यह पंचषष्ठि स्तोत्र (Panchashashti Stotra)की रचना की गई है।श्रद्धा और भक्ति के साथ जो भाग्यशाली इस यंत्र की पूजा करता है उसके घर में भूत प्रेत और पिशाच आदि का कोई भी भय नहीं रहता है। यह एक अत्यंत प्रभावशाली गुप्त मन्त्रों से भरा हुआ पैसठिया यंत्र है