No. 54 Sambhav Jinvar Vinanti Jain Stavan संभव जिनवर विनंती…
Sambhav Jinvar Vinanti संभव जिनवर विनंती… (राग : यह है पावन भूमि… तारा विना श्याम…../एक पंखी आवीने…. ए मेरे वतन के…) संभव जिनवर विनंति, अवधारो गुण ज्ञाता रे; खामी नहीं मुज खिजमते, कदीये होशो फलदाता रे. ।।१।। कर जोडी ऊभो रहूं, रात दिवस तुम ध्याने रे; जो मनमां आणो नहीं, तो शुं कहीए थाने रे.

