No. 48  67 Tirthvandana सड़सठ तीर्थवंदना

67 Tirthvandana सड़सठ तीर्थवंदना 

1) ‘न’ नगपुरातीर्थ- श्री उपसर्गहरपार्श्व।

केशी गणेशे धरी एक निष्ठा, कोधी प्रभुनी प्राण प्रतिष्ठा, 

शेष शरीरे प्रभुजी बिराज्या, हर उपसर्ग नामे नवाज्या।

(२) ‘मो’ मोहन खेड़ातीर्थ श्री आदिनाथ।

भवाब्धितरणी मोक्षे निसरणी, मूर्ति तमारी अमीरसझरणी, 

मनमोहन मोहनखेड़ तीर्थे, आदिश अर्यु शिवना ज अर्चे।

3) ‘अ’ अल्हाबादतीर्थ- श्री आदिनाथ- केवलभूमि

केवल्यभूमि ऋषभेश तारी, भव्यजीवोने बहु उपकारी, 

नेह नजरथी निरखु तने ज्या, आबाद अल्हा बनशु हवे त्यां।

(४) ‘रि’ रींगणोदतीर्थ- श्री नेमिनाथ।

शेवये सेवो प्रभु मोक्षगामी, श्री रींगणोद शुभ तीर्थधामी, 

छो योगक्षेम करनार देवा, हे नेमिनाथ! करुं आप सेवा।

(५) ‘ह’ हत्यूँडीतीर्थ- श्री महावीर

सिद्धार्थना छो हे लाल देवा, अहोनिश तारी करूं एक सेवा, 

हत्यूँडी तीर्थे महावीर राता, तुज पूजने सौ दुखड़ा पलाता।

(६) ‘ता’ तारणगिरि तीर्थ- श्री अजितनाथ।

तारणगिरिनी टोचे चढ़ीने, हे नाथ बैठा सुखने मढ़ीने, 

ऊंची अटारी सहु थी तमारी, अजितेश पूजी लहु भवपारी।

(७) ‘ण’ नंदिवर्धनपुर- श्री जीवित स्वामी

साक्षात अरिण आजे य जावा, अब नांदीयामा चलो पाप धोवा, 

जीवित स्वामी वीरजिन वंदु, पूजी तने हुं चिरकाल नंदु।

(८) ‘न’ नर्दुलपुर (नाडोल) श्री पद्मप्रभुस्वामी

ज्यां मानदेवसूरिये बनाई, श्रीसंघ रक्षा करी शांति चावी, 

ते नाम नाडोल तीर्थे हुं जाऊं, प्रणेश पद्मप्रभु गुण गाऊं।

(९) ‘मो’ मोहनातीर्थ- श्री पार्श्वनाथ।

छे मोहनामा महानंदकारी, भव्यजीवोनां भवफंदवारी, 

वामातणो नंदन नेह कीजे, वांधो प्रभु पातिकने दहीजे।

(१०) ‘सि’ सिरणवा पर्वत- सिरोही श्री आदिनाथ।

नमे सिरणवा गिरिमाल राजे, धामे सिरोहीपुरमा बिराजे, 

श्रीकोलराख्ये दुर्गे जिनेश, आदीश्वरो हुं प्रणमुं जगदीश।

(११) ‘न’ धमडका- श्री शांतिनाथ।

गामे धमडका नामे निहाळी, मूर्ति प्रभुनी अति रढियाळी, 

श्रीकच्छभूमिमही ए गवाणी, शांतिप्रभु छे त्रिहुरूप खाणी।

(१२) ‘ण’ नंदीश्वर द्वीप- श्री बावन जिनालय

ज्यां देवदेवी बहुवार आवे, यात्रा करी उत्कट भाव भावे, 

नंदीश्वरे बावन चैत्य मोटा, भावे भजंता नहि पुण्य त्रोटा।

(१३) ‘न’ नलीयातीर्थ- श्री चंद्रप्रभस्वामी

नामे नलीया तीर्थे बिराजे, चंद्रप्रभुजी जग जस गाजे, 

छो शैत्यदायी रजनीश जेवा, भावे करूं हुं तुज भक्ति देवा।

(१४) ‘मो’ मोडपुर- श्री सुपार्श्वनाथ

श्री मोडपुरे अतिसायी आजे, सुपार्श्व तारी पडिमा बिराजे, 

लळी लळीने तुम पाय लागुं, कर्मेन्धनोने दह वीतरागु।

(१५) ‘आ’ आरासणा- श्री नेमिनाथ

आरासणानी धरती सुखाली, छो नेमिदेवा धरता गुणाली, 

काळाश रंगे नहि दोष अंगें, बनवा विरागी प्रणमुं उमंगें।

(१६) ‘य’ यशनगर (केकींद)- श्री चंद्रप्रभुजी

छे मारवाड़े अति अभिरामे, केकींद नामे यशपुर गामे, 

परचा पूरे त्यां चंद्रप्रभुजी, वांदी लहु हुं पुण्यती पुंजी।

(१७) ‘रि’ रीछेडतीर्थ- श्री पार्श्वनाथ

रींछेडकेरी रमणी धरित्री, पार्वेश आपे कीधी पवित्री।

तीमही मने पावित नाथ कीजे, समरुं तने हुं मुज दोष छीजे।

(१८) ‘या’ यादवपुर- श्री नेमिनाथ

प्रेम सदाये प्रणमे भूपालि, हे नेमि! तारी पडिमा रूपाली, 

ते यादवोनां पुरनां प्रतापी, प्राणेश! पूजुं बनवा अपापी।

(१९) ‘रा’ नंदकुलवती- श्री आदिनाथ, श्री नेमिनाथ।

ज्यां होय ऊंचा गढ़ मतवाला, बैठा जिहां बे जिन रखवाला,

ते नाडलाई तीर्थे हुं जाऊं, आदीश-नेमि नमी हर्ष पाऊं।

(२०) ‘न’ नदबई तीर्थ- श्री महावीर स्वामी

नमो नमस्ते महावीर साईं, नदबई धामे तुमची रधाई, 

सौ कर्म युद्धे थई योध लागुं, हे वीर! हुं तो वीरता ज मांगुं।

(२१) ‘मो’ मोहीतीर्थ- श्री पार्श्वनाथ

मेवड़ देशे शुभठाण मोही, त्यां पार्श्वमूर्ति मुज चित्त मोही,

तीर्थेश्वरा हे भवतीर जावा, पूजी तने हुं ग्रहूं भक्तिल्हावा।

(२२) ‘उ’ उपकेशपुर- श्री महावीर

कंचनवर्णी कमनीयकाया, श्रीवीरनी छे सुखकार छाया, 

नोखी अनोखी प्रभुनी कहाणी, उपकेशपुरे परया पुराणी।

(२३) ‘व’ वरमाणतीर्थ- श्री महावीर

हुं वीर वीर वीर एम बोलुं, नाम नदीमां दिलडुं जबोलुं, 

वरमाण जीवित स्वामी वधातु, पापो पखाळीने पावन थाऊं।

(२४) ‘जझा’ श्री झाकोडाजी शांतिनाथ

बहु पुण्ययोगे जस सेव लाधे, सेव्या थकी ते निज शान वाधे, 

झाकोडनाम शुभ तीर्थनेता, ते शांतिदेवा प्रणमो प्रणेता।

(२५) ‘या’ यादगिरि- श्री सुमतिनाथ

छे यादगिरि धरती मझारी, श्री मंगलेय भवतीरकारी, 

सन्मति पामुं तुज पूजनाथी, मांगुं भवोभव प्रभु तुं ज साथी।

(२६) ‘ण’ नांदगिरि- श्री पार्श्वनाथ

छे नांदगिरि नमणो मजानो, डुंगर ऊपर गुणनो खजानो, 

पार्थेश बैठो परचो बतावे, आजे च जाता दिल हरखावे।

(२७) ‘न’ नरोडतीर्थ- श्री पद्मावतीपार्श्व।

पद्मावती पारसदेव पामी, आजे थयो हुं शिवनो ज कामी, 

नगरी नरडा पुण्य प्रतापी, परया पूरता प्रभु जाप जापी।

(२८) ‘मो’ मोढेरा- श्री महावीर

ज्यां बप्पभट्टिसूरिजी उपासे, श्री वीर केरी पडिमा प्रकाशे, 

ते तीर्थ मोढेरक नाम धामे, वंदु विभुने शिवलब्धि कामे।

(२९) ‘लो’ लोटाणातीर्थ- श्री आदिनाथ

लोटाणगामे गिरिमूल सोहे, नाभेय बैठा भवि पडिबोहे, 

शेत्रुंजावाला करुं कालावाला, परचा पूरोने जग रखवाला।

(३०) ‘ए’ एल्लुर- श्री पार्श्वनाथ

एल्लुरतीर्थ अरिहंत योगी, सेवे तने सौ भोगी-अभोगी, 

आव्यो करेवा तुज भक्ति द्वारे, तारा विना को नहि हित सारे।

(३१) ‘स’ सत्यपुर- श्री महावीर

जय हो तमारा वीर सत्यपुरे, जीवित हૈયे रहेजो हजरे, 

विश्वास तारो मुजने सदाये, रीझी प्रभु सौ रहुं सुख छाये।

(३२) ‘व’ वरकाणातीर्थ- श्री पार्श्वनाथ

वामेय द्वालो वरकाणतीर्थ, वेगे जुहारो शिवना ज अर्थे, 

त्रिकरणयोगे पूजी तने हुं, पापो दहीने पुण्य लहुं हुं।

(३३) ‘सा’ सावत्यीतीर्थ- श्री संभवनाथ

हे संभवेश! भवपारकारा, कल्याण चारे मन मोहनारा, 

सावत्ती नामे तीर्थे रचाऊं, पूजा तमारी हुं शुद्ध थाऊं।

(३४) ‘हुं’ हुशियारपुर

सौ भक्त पामे निज हित केरी, ज्यां हुशियारी धरमे अनेरी, 

ते हुंशायारपुरनां प्रतापी, पूजो प्रभुने शुभ जाप जापी।

(३५) ‘ण’ नंदासण- श्री पार्श्वनाथ

नंदासणे भद्रकभाव कारी, पुण्ये लहो पारसने जुहारी,

तिहुयण नामे जयकार कीजे, भेटे भवि जे तस होश सीत्रे।

(३६) ‘ए’ एलीयपुर- श्री वासुपूज्यजी

एलीयपुर छे गिरीनी टळेटी, त्यां वासुपूज्य जिनराज भेटी,

मोहादि मल्लो विखराय जेथी, कदीये भूलुं ना प्रभुने हवેથી।

(३७) ‘सो’ सौरीपुर- श्री नेमिनाथ

सौरीपुरी छे बहु शौर्यवंता, नेमीश्वरा ते शिवनारकंता,

कल्याण हुंता जिनराज केरा, ज्यां होय वंदी लहु पुण्य ढेरा।

(३८) ‘पं’ पंच पहाड- श्री मुनिसुव्रत स्वामी

पंच पहाडे वसमा चढ़ाणे, वीसमा प्रभुने वांदो अटाणे,

हे सुवतेश! मुज चित्त लागो, सेव्यो तुं टाळो वसमा विवादो।

(३९) ‘य’ यवलेश्वर- श्री पार्श्वनाथ

छे मेदपाटे गिरिए अटारी, यवलेश्वरा पारसनाथ तारी,

आवे घणा यात्रिक दौड़ी दौड़ी, पूज्यो तने प्रेमळ हाथ जोड़ी।

(४०) ‘न’ नवरोईतीर्थ- श्री धर्मनाथ

हे धर्मनाथ प्रभुजी तमारा, रत्नपुरीमां कल्याण यारा, 

नवरोईतीर्थ नेहे निहाळुं, पार्श्वश पूजी मुज मोह गाळुं।

(४१) ‘मु’ मुच्छाळा- श्री महावीर

महावीर तारी मूरती मजानी, वंदुं विवेके सुगुणनी खजानी, 

मुच्छाळा अचरिज भारी, सेवे अहोनिश बहु नरनारी।

(४२) ‘क्का’ काकंदी तीर्थ- श्री सुविधिनाथ

वळी अविधि धरतो सुविधि, नवमां नमुं हुं स्वामी सुविधि, 

कीकंदीमांहे कल्याण यारे, पहुंचुं पूजीने भवना किनारे।

(४३) ‘रो’ रोहित्यपुरे- श्री पार्श्वादिवीर

रोहित्यपुरे त्रण चैत्य वंदो, पार्श्वादिवीर प्रभु सुखकंदो, 

धरी नेह पूजा प्रभुनी करीजे, तो स्वप्नमांहे परचा वरीजे।

(४४) ‘स’ सवणातीर्थ- श्री वासुपूज्य

छो वासुपूज्य विभु वीतरागी, तो ये प्रभु हुं तुनयो ज रागी, 

स्वामी बिराजो सवणा सुगामे, भावे भजे ते शिवलक्ष पामे।

(४५) ‘व्यं’ वर्धमानपुर- श्री शांतिनाथ

शूलपाणीयक्षे उपसर्ग कीधा, ज्यां वीरने ते धरती प्रसिद्धा, 

पंचालदेशे पुर वर्धमान, शांतीश सेवुं बनी एकतान।

(४६) ‘पा’ पावापुरीतीर्थ- श्री महावीर स्वामी

निर्वाण भूमि पावापुरीये, हे साद शिवनो जीवने बधाये, 

दीपावलीए वीर शिव पामे, कल्याण उजवे सहु गांव-गामे।

(४७) ‘व’ वाणारसी तीर्थ- श्री पार्श्वसुपार्श्वनाथ

पार्श्वसुपार्श्व जगदीश केरा, भदैनी भेलुपुरमां भलेरा, 

कल्याण हुंता मली दोय आठ, वाणारसीमां तज भव गांठ।

(४८) ‘ख’ पटणातीर्थ- श्री विशाल स्वामी (विहरमान)

अजोड प्रतिमा पार्श्वादि केरी, ने धर्मयक्ष ठवणा भलेरी, 

ते तीर्थनामे पटणामां वांदो विशालस्वामी पूजी आनंदो।

(४९) ‘णा’ नागार्जुननगर- श्री ह्रींकार पार्श्वनाथ

गुंटुर नागार्जुननाम पुरें, ह्रींकार पार्श्वजिन पाप चूरे, 

तकदीरयोगे जिनपार्श्व भेटी, तकलीफ टाळी लहो पुण्य पेटी।

(५०) ‘स’ सरढवतीर्थ- श्री आदिनाथ

हे आदिदेवा सहु कामदाता, देवाय! तारा गुणगान गाता, 

हुं नम्रताथी मृजुता ग्रहेंवा, सरढवतीर्थे करुं आप सेवा।

(५१) ‘णो’ नোখमंडी श्री पार्श्वनाथ

मंडी अनोखी जस नाम नોખा, यात्रा करता दिल थाय चोखा।

श्री पार्श्व पूजी अघने पखाळी, भेटी प्रभु मूरत रढियाळी।

(५२) ‘म’ मंगलपुर- श्री नवपल्लवपार्श्व

छे मांगरोळे नवपल्लवाजी, पार्श्व पूजंता दिल थाय राजी, 

परभावपूर्णी प्रभावपूर्णी मूरति प्रभुनी उज्ज्वळवर्णी।

(५३) ‘ग’ गजाग पर्वत- श्री महावीर

दशार्णभद्र व्रत शुभस्थान गजागरीने जिन वर्धमान, 

आशा पूरतां हरि सर्वगास, पूजुं प्रभुने सहु मुक्तिवास।

(५४) ‘ला’ लाजतीर्थ श्री आदिनाथ

क्षिति मरुनी करता समेव श्रीलाजतीर्थ प्रभु मारुदेव, 

निज हित याहु ग्रही नाम तास, पूज्ये प्रभुने अधिकोउजस।

(५५) ‘ण’ नंदराई- श्री पार्श्वनाथ

मेवाड़ देशे पुरी नंदराई, ज्यां वीतरागी विभुनी वडाई, 

शोध्यो जडे ना जगदीश एवो, आजे उमंगे प्रभु तेह सेवो।

(५६) ‘य’ यलोडातीर्थे- श्री जीरावला पार्श्वनाथजी

चित्ते चलोडा शुभ तीर्थ धरो, जीरावला पारसने जुहारो,

निश्चे प्रभु ते सहु विघ्न वारे, पहुंचो पूजीने भवना किनारे।

(५७) ‘स’ समळीविहार- श्री मुनिसुव्रत स्वामी

समळीविहारे मुनिसुव्रतेश, भृगुकच्छपुरे प्रणमुं विशेष,

ज्यां अश्व बोध करवा पधार्या, पुण्ये पुजता मुज पाप हार्या।

(५८) ‘वे’ वेलार तीर्थ- श्री आदिनाथ

चालो हवे सौ वेलागामे परचा पूरता ऋषभेश धामे,

पूजी स्तवीने जिन आदिदेवा, मांगुं भवोभव तुम एक सेवा।

(५९) ‘सि’ सिंहपुरी- श्री श्रेयांसनाथजी

भव्य जीवोने दीये प्रेम ढेरा, दानेश्वरी जे सहु श्रेयः केरा, 

कल्याणभूमि तुंज सिंहपुरी, श्रेयांसदेवा करुं भक्ति भूरि।

(६०) ‘प’ परोलीतीर्थ- श्री नेमिनाथ

पंचोपचारी अष्टोपचारी, सर्वोपचारी करता उदारी, 

श्री नेमिनाथ प्रभु निर्विकारी, पूजो परोली तीर्थाधिकारी।

(६१) ‘ढ’ ढवाणातीर्थ- श्री आदिनाथ

नामे ढवाणा गामे गवाणा, पूजो प्रभुने नरदेवराणा,

पंचांगथी हुं प्रणमुं घ्याळुं, धो मोक्ष मोहे सेव्यो मयाळु।

(६२) ‘म’ मंडलिकपुर- श्री गाडलियापार्श्वनाथ

मंडलिकपुरे करे सुरसेव, हे गाडलियाभिध पार्श्वदेव!

नानी छतां ये नहि जेह छानी, प्रेमे पूजुं हुं मूरति मजानी।

(६३) ‘हा’ हस्तिगिरि- श्री आदिनाथ

चकी भरतना हाथी घणाये, सुरलोक पामे हस्तिगिरिये, 

ते तीर्थधामे गिरिराज टुंके, नाभेयने सौ नर देव झुके।

(६४) ‘ई’ इलादुर्ग- श्री शांतिनाथ

ईडरगढ़मां मंढ एक मोटો, बावन चैत्य नहि जास जोडो, 

त्यां संघशांतिकर देव शांति, पूजा तने हुं तुज भवभ्रांति।

(६५) ‘म’ मंडपदुर्ग- श्री सुपार्श्वनाथ

मंडपदुर्गे स्वामी सुपास, भेटुं तने हुं धरी उर आश, 

सप्तम जिनेंद्र भय सात टाळो, निर्मम नेह, भव मुज गाळो।

(६६) ‘ग’ गजपुर- शांति-कुंथु-अर

जिन शांति-कुंथु-अरनाथ तारा, गजपुरतीर्थे कल्याण बारा, 

आदीश वदुं तपधर्म योगी, पुण्ये पुजता न हि कर्मयोगी।

(६७) ‘ल’ लक्ष्मणीतीर्थ- श्री पद्मप्रभु

मालवनी ज्यां धरती विरामे, पद्मप्रभु त्यां लक्ष्मणी धामे, 

यात्रु घणा ये दिन रात आवे, थई एकचित्ते तुज गुण गावे।

 

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