No. 46 Sakal Tirth Vandana सकल-तीर्थ-वंदना

Sakal Tirth Vandana सकल-तीर्थ-वंदना  सकल तीर्थ वंदुं कर जोड़, जिनवरनामे मंगल कोड; पहले स्वर्गे लाख बत्तीस, जिनवरचैत्य नमुं निशदिश। || १ || बीजे लाख अट्ठावीस कह्यां, त्रीजे बार लाख सद्दह्यां; चोथे स्वर्गे अड़ लिख धार, पांचमे वंदुं लाख ज चार। || २ || छठ्ठे स्वर्गे सहस पचास, सातमे चालीश सहस प्रासाद; आठमे स्वर्गे छ हजार,

No. 45 Panchashashti Yantra Garhit Sri Chaturvinshati Jin Stotram

पंचषष्टियन्त्रगर्भित श्री चतुर्विंशतिजिनस्तोत्रम्  Panchashashti Yantra Garhit Sri Chaturvinshati Jin Stotram वन्दे धर्मजिनं सदा सुखकरं, चन्द्रप्रभं नाभिजं,  श्रीमद्वीरजिनेश्वरं जयकरं, कुंथु च शान्ति जिनम् |  मुक्तिश्री-फलदाच्यनन्तमुनिपं, वन्दे सुपार्श्व विभुं,  श्रीमन्मेधनृपात्मजंच सुखदं, पार्श्व मनोडभीष्टदम् ……..1 श्रीनेमिश्वरसुव्रतौ च विमलं, पद्मप्रभं सांवरं, सेवे सम्भवशंकर नमिजिनं, मल्लिं जयानन्दनम् ।  वन्दे श्रीजिनशीतलं च सुविधिं, सेवडजितं मुक्तिदं,  श्री संघ बत पंचविंशतितमं, साक्षादरं वैष्णवम्. 

No. 44 Namaskar Mantradhiraja Stotram नमस्कारमंत्राधिराजस्तोत्रम्

नमस्कारमंत्राधिराजस्तोत्रम् Namaskar Mantradhiraja Stotram यः सर्वदुःख दलने किल कल्पवृक्ष-श्चिंतामणी शुभमनोरथ पूरणे सः कन्दर्पदर्पदलनैकविधौ दवाग्नि र्लोकत्रये विजयते परमेष्ठिमंत्रः …१ सर्वागमश्रुत समुद्र सुधेन्दु सारः चारित्रचंदनवनं सदनं सुखानां कल्याण कुन्दनखनिर्दमनं दराणं, लोकत्रये विजयते परमेष्ठिमंत्रः …२ संसारसागरनिमज्जदपूर्वनौका सिद्धौषधिर्विविधरोगविनाशने च निःशेषलब्धिबलबोधतरोश्च बीजं लोकत्रये विजयते परमेष्ठिमंत्रः …३ सूर्यसहस्रकिरणैर्हरति तमांसि सिंहो यथा गजगणांश्च नखैर्निहन्ति, संसारवर्ति दुरितानि तथैव मंत्रो लोकत्रये विजयते परमेष्ठिमंत्रः …४

Shree Chandraprabha Vidhya Stavah

No. 21 Shree Chandraprabha Vidhya Stavah श्री चंद्रप्रभ विद्या स्तवः

श्री चंद्रप्रभ विद्या स्तवः Shree Chandraprabha Vidhya Stavah ॐ चंद्रप्रभ। प्रभाधीश। चंद्रशेखरचंद्रभूः ।  चंद्रलक्ष्माङ्क। चंद्राङ्ग। चंद्रबीज । नमोस्तुते …..१ ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री चंद्रप्रभ ! ह्रीं श्रीं कुरु कुरु स्वाहा।  इष्टसिद्धि-महासिद्धितुष्टिपुष्टिकरो भव…२ द्वादशसहस्रजप्तो वांछितार्थ फलप्रदः।  महित्वा त्रिसंध्यं जापो, सर्वाधिव्याधिनाशनः ……३ सुरासुरेन्द्रमहितः, श्री पांडवनृपस्तुतः  श्री चंद्रप्रभतीर्थेशः, श्रियं चंद्रोज्जवलां कुरु…..४ श्री चंद्रप्रभविद्येयं, स्मृता सद्यं फला मता।

Shri Chintamani Parshwanath Stotra

No. 19 Shri Chintamani Parshwanath Stotra श्री चिंतामणिपार्श्वनाथ स्तोत्र

Shri Chintamani Parshwanath Stotra : श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ स्तोत्र में ओमकार और ह्रींकार से युक्त श्री चिंतामणि मंत्र बताया गया है। इसके प्रभाव से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस स्तवन से साधक को मनोवांछित फल ऐश्वर्य सभी प्रकार के पुरुषार्थ की प्राप्ति करने में सहायक यह स्तोत्र चिंतामणि समान है। इस स्तोत्र

Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra

016 Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra श्री बृहद् उवसग्गहरं स्तोत्र

श्री बृहद् उवसग्गहरं स्तोत्र यह सभी प्रकार के उपसर्ग को दूर करने वाला महाप्रभविक श्री बृहद् उवसग्गहरम् स्तोत्र (Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra )है। यह स्तोत्र दो विभाग में विभाजित है। बृहद और लघु बृहद् 27 श्लोक प्रमाण है,एवं लघु 5 श्लोक प्रमाण है। श्लोक नम्बर 15 और 16 ने कहा है श्री पार्श्वनाथ भगवान के