No. 29 Shri Ambika Devi Mantra Yukt Ashtak Stotra

Shri Ambika Devi Mantra Yukt Ashtak Stotra श्री अंबिकादेवी मंत्र युक्ताष्टक स्तोत्र

यह स्रोत Shri Ambika Devi Mantra Yukt Ashtak Stotra जैन धर्म के श्री अंबिका देवी का स्तोत्र है। यह विशिष्ट मंत्रों से  गर्भित स्तोत्र सभी प्रकार के दुख, विघ्न और उपद्रव को दूर करने की क्षमता रखता है। इस आठ अष्टक में यानि कि आठ काव्य के अष्टक में शासन देवी अंबिकादेवी की स्तुति मंत्र और उनकी महिमा का वर्णन करने में आया है।

 

ॐ महातीर्थ रैवतगिरि मंडने। जैनमार्गस्थिते विघ्नाभिखंडने ।। 

                   नेमिनाथांघ्रिराजीव सेवापरे। त्वं जय जगज्जंतु रक्षाकरे!.                     1

ह्रीँ महामंत्ररूपे शिवे करे। देवि ! वाचालं सत् किंकिणि नूपुरे ।। 

                 तार हारावली राजितोरः स्थले । कर्णताटंक रूचि रम्य गंडस्थले. …….. 2

अंबिके ! हाँ स्फुरद् बीजविधे स्वयं। ह्रीँ समागच्छ मे देहि दुःखक्षयं ।। 

           द्रां दुतं द्रावय द्राययोपद्रवं। द्रीं दुहि क्षुद्र सर्वेभा कंठीरवान्…………….  3

क्लौं प्रचंडे प्रसीद प्रसीदे क्षणे। ब्लूँ सदा सुप्रसन्ने विदेही रक्षणे ।। 

       सः सतां दत्त कल्याणमालोदये। ह्रः क्लीं नमस्तेऽम्बिके करस्थ पुत्रद्वये.          4

इत्थमुद्भूत माहात्म्य मंत्रस्तुते। क्रौं समालीढ वर्तुल यंत्रस्थिते ।। 

               ह्रीँ युतांबे ! मरुत् मंडलालंकृते। देहि मे दर्शनं ह्रीं त्रिरेखावृते.               5

नाशिताशेषमिथ्यादृशां दुर्मदे। शांतिकीर्ति धृति स्वस्ति सिद्धि प्रदे।। 

              दुष्टविद्यबालोच्छेदने प्रत्यले। नंद ! नंदांबिके ! निश्चले निर्मले.                6

देवि ! कौष्मांडि दिव्ये शुभे ! भैरवे। दुःसहे! दुर्जये ! तपाहेमच्छवे । 

            नाममंत्रेण निर्नाशितोपद्रवे ।। पाहि मां पाहि मां पीठस्थकंठीरवे.           7

देवदेवीगणैः सेवितांघ्रिद्वये। जागरूकप्रभावैकलब्धिमये। 

       पालिताशेष जिनेंद्र (जैनेंद्र) जिनालये। रक्ष मां रक्ष मां देवि ! अंबालये..   8

अंबिकाष्टकं    चैतत्    नित्यं    पाठेन    सौख्यदं, 

                   अष्टोत्तरं    मंत्रजापात्   शान्तिसिद्धिकरं    ध्रुव                          9

श्री संघाय श्रीगच्छाय कुटुम्बाय हितं श्रीदं 

                            अंबिकास्तोत्रमिदं धुर्यं प्रसन्नास्तु श्री अंबिका.                   10

गजेंदुखकर (२०१८) वर्ष अश्व युग कृष्ण चतुर्दशी शनौ 

                       प्राचीनाल्लिखितं पुनः दर्शनविजयैर्नदः                               11

 

  श्री अंबिकादेवी मंत्र युक्ताष्टक स्तोत्र  

 

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