श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र (Shri Ghantakarna Mahavir Stotra) के अंदर सभी प्रकार की व्याधियां अन्य भयानक संक्रामक रोगों के समय रक्षण करने की प्रार्थना की गई है। इस स्तोत्र के अनुसार यदि घंटाकर्ण वीर का मंत्र व यंत्र जिस स्थान पर लिखकर स्थापित किया जाता है, वहां वात पीत, कफ और अन्य रोगों से तथा भूत प्रेत, पिशाच, राक्षस, सर्प आदि के भयों से रक्षा होती है, व्यक्ति की अकाल मृत्यु टल जाती है।
Shri Ghantakarna Mahavir Stotra श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र
ॐ घंटाकर्ण ! महावीर !, सर्वव्याधिविनाशक !;
विस्फोटकभये प्राप्ते, रक्ष रक्ष महाबल ! १
यत्रत्वं तिष्ठसे देव !; लिखितोऽक्षरपंक्तिभिः,
रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति, वात्तपित्तकफोद्भवाः. २
तत्र राजभयं नास्ति, यान्ति कर्णे जपाः क्षयम्;
शाकिनी भूत वेताला, राक्षसाः प्रभवन्ति न ३
नाऽकाले मरणं तस्य, न च सर्पेण दृश्यते;
अग्निचोरभयं नास्ति, नास्ति तस्याप्यरिभयम्. ४
ॐ ह्रीं श्री घंटाकर्ण ! नमोस्तु ते ठः ठः ठः स्वाहा
।। Shri Ghantakarna Mahavir Stotra श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र।।
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सर्वकार्यसिद्धिदायक श्रीशान्तिधारा पाठः