23वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ परमात्मा की सेविका, श्री पद्मावती देवी को समर्पित Shree Padmavathi Stotram है। इस स्तोत्र में माँ, पद्मावती के विभिन्न दिव्य रूपों, नाम और महान शक्तियों का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र, मृत्यु, दरिद्रता आदि सभी पापों के एवं रोगों को तथा नकारात्मक शक्तियों को नाश करने वाला है।
इस स्तोत्र का नित्य पाठ करने से शत्रुओं का भय दूर होता है। अकाल मृत्यु टलती है, सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होते हैं तथा सभी परम्पकार की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
Shree Padmavathi Stotram श्री पद्मावती स्तोत्रम्
ॐ नमोऽनेकांत दुर्वारमतसद् वंश मानवे।
जिनाय सकलाभिष्टदायिने, कामधेनवे. 1
स्वस्ति श्री जिनराजमार्गकमले प्रद्योत सूर्यप्रभे ।
स्वस्ति श्री फणिनायिके!, सुरनराराध्ये जगन्मंगले ।
स्वस्ति श्री कनकाद्रिसन्निभ महासिंहासनालंकृते ।
विद्यानामधिदेवते !, प्रतिदिनं मां रक्ष पद्माम्बिके. ….2
जय जय जगदम्बे ! मत्तकुंभे ! नितम्बे !
हर हर दुरितं मे स्वस्ति मानाभिरामे ।
नय नय जिनमार्गे, दुष्टघोरोपसर्गे,
भव भव शरणं मे, रक्ष मां देवि पद्म 3
ॐ ह्रीं बीजं प्रणवोपेतं, नमः स्वाहांतसंयुतम् ।
देदिप्यमानं हृत्पद्म, ध्यायेऽभिष्टफलप्रदम्. 4
तद बीजं देवताकारं, पंचानां कवचान्वितम् ।
गुरूपदेशतो ध्यायेत् पापदारिद्रभंजनम्. 5
ॐ नमस्तेऽस्तु महादेवी कल्याणी भुवनेश्वरी।
चंडी कात्यायनी गौरी, जिनधर्म परायणी………… 6
पंचब्रह्मपदाराध्या, पंचमंत्रोपदेशिनी।
पंचव्रतगुणोपेता, पंचकल्याणदर्शनी. 7
नम श्री स्तोतला नित्या, त्रिपुरा काम्यसाधिनी ।
मदोन्मालिनी विद्या महालक्ष्मी सरस्वती. 8
सारस्वतगणाधीशा सर्वशास्त्रोपदेशिनी।
सर्वेश्वरी महादुर्गा त्रिनेत्री फणिशेखरी. 9
जटाबालेंदुमुगुटा कुर्कुटोरगवाहिनी।
चतुर्मुखी महायशा, धनदेवी गुह्येश्वरी. 10
नागराजमहापत्नी, नागिनी नागदेवता।
नमः सिद्धांत संपन्ना द्वादशांग परायणी. 11
चतुर्दश महाविद्या, अवधिज्ञानलोचना।
वासंती वनदेवी च वनमाला महेश्वरी. 12
महाघोरा महारौद्रा, वीतभीता ऽभयंकरी।
कंकाली कालरात्री च, गंगा गांधर्वनायकी. 13
सम्यग् दर्शन संपन्ना, सम्यग् ज्ञानपरायणी।
सम्यग् चारित्र संपन्ना, नराणां उपकारिणी. 14
अगण्य पुण्यसंपन्ना गणवी गणनायिकी।
पातालवासिनी पद्मा, पद्मास्या पद्मलोचना.. 15
प्रज्ञप्ति रोहिणी जम्भा, स्तम्भिनी मोहिनी जया।
योगिनी योगविज्ञानी, मृत्युदारिद्रयभंजिनी. 16
क्षमासंपन्नधरणी, सर्वपापनिवारणी।
ज्वालामुखी महाज्वालामालिनी वज्रशृंखला. 17
नागपाशघरा धौर्या श्रेणीताम्र फलान्विता ।
हस्ता प्रशस्ता विद्याऽऽर्या, हस्तिनी हस्तवाष्टगी. 18
वसंतलक्ष्मी गीर्वाणी, शर्वाणी पद्मविष्टरा ।
बालार्कवर्णशंकाशा, शृंगाररसनायिकी. 19
अनेकांतात्मतत्वज्ञा, चिंतितार्थफलप्रदा।
चिंतामणिः कृपापूर्णा, पापारंभविमोचिनी. 20
कल्पवल्लीसमाकारा, कामधेनु शुभंकरी।
सधर्मवत्सला सर्वा, सद् धर्मोत्सववर्धिनी. 21
सर्वपापोपशमनी, सर्वरोगनिवारिणी।
गंभीरा मोहिनी सिद्धा, शेफालितरुवासिनी. 22
अष्टोत्तरशतं स्तोत्ररत्ननामांक मालिकां ।
त्रिसंध्यं पठयेत् नित्यं, पापदारिद्यनाशनम्. 23
दिनाष्टकं त्रिसन्ध्यं यो ध्यानपूजाजपान्वितम् ।
नामांकमालिकास्तोत्रं, पठते स वांछितं लभेत्. 24
दिव्यं स्तोत्रमिदं महासुखकरं चारोग्य संपत्करं ।
भूत प्रेत पिशाच दुष्टहरणं पापौधसंहारकम् ।
अन्येनार्पित वांछितस्य निलयं सर्वापमृत्युंजयं ।
देव्या प्रीतिकरं कवित्वजनकं स्तोत्रं जगन्मंगलम्…. 25
जैन स्तोत्र संग्रह