No. 42 Shri Gautam Ashtak Chhand – श्री गौतमाष्टक छंद

श्री गौतमाष्टक छंद

 Shri Gautam Ashtak Chhand

वीर जिनेसर केरो शिष्य, गौतम नाम जपो निशदिश; 

जो कीजे गौतमनुं ध्यान, तो घर विलसे नवे निधान ….१

गौतम नामे गिरिवर चढ़े, मनवांछित हेला संपजे, 

गौतम नाम नावे रोग, गौतम नामे सर्व संयोग ….      २

जे वैरी विरूआ वंकड़ा, तस नामे नावे ढुंकड़ा, 

भूत प्रेत नवि खंडे प्राण, ते गौतमना करू वखाण ….3

गौतम नामे निर्मल काय, गौतम नामे वाघे आय, 

गौतम जिनशासन शणगार, गौतम नामे जयजयकार .   ४

शाल दाल सुहरा धृतगोल, मनवांछित कापड़ तंबोल; 

घरे सुघरणी निर्मल चित्त, गौतम नामे पुत्र विनीति …..     ५

गौतम उदयो अविचल भाण, गौतम नाम जपो जगजाण,

मोटा मंदिर मेरू समान, गौतम नामे सफल विहाण……..६

घर मयगल घोड़ानी जोड़, वारू पहुंचे वंछित कोड; 

महियल माने महोटा राय, जो तुठे गौतमना पाय ……      ७

गौतम प्रणम्या पातक टळे, उत्तम नरनी संगत मले; 

गौतम नामे निर्मल ज्ञान, गौतम नामे वाधे वान ……..       ८

पुण्यवंत अवधारो सहु, गुरू गौतमना गुण छे बहु; 

कहे ‘लावण्यसमय’ कर जोड़, गौतम तुठे संपत्ति कोड..  ९

Shri Gautam Ashtak Chhand – श्री गौतमाष्टक छंद

 

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