No. 41 Sri Chintamani Parsvnath Stotra श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ स्तोत्र

Sri Chintamani Parsvnath Stotra श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ स्तोत्र

आणी मन शुद्ध आस्था, देव जुहारूं शाश्वता। 

पार्श्वनाथ मन वांछित पूर, चिंतामणि मारी चिंता चूर          (1)

अणियारी तारी आंखडी, जाणे कमळ तणी पांखडी 

मुख दीठे दुःख जावे दूर, चिंतामणि मारी चिंता चूर           (2)

को केहने को केहने नमे, मारा मनमां तूहीं रमे; 

सदा जुहारूं उगते सूर, चिंतामणि मारी चिंता चूर             (3)

बिछडिया वालेसर मेल, वैरी दुश्मन पाछा ठेल; 

तुं छे मारे हाजरा हजूर, चिंतामणि मारी चिंता चूर             (4)

एह स्तोत्र जेह मनमें धरे, तेहनां काज सदाय सरे;

आधि व्याधि दुःख जावे दूर, चिंतामणि मारी चिंता चूर       (5)

मुज मन लागी तुम शुं प्रीत, दूजो कोई न आवे चित्त; 

कर मुज तेज प्रताप प्रचुर, चिंतामणि मारी चिंता चूर          (6)

भव भव देजो तुम पद सेव, श्री चिंतामणि अरिहंत देव; 

समय सुंदर कहे गुण भरपूर, चिंतामणि मारी चिंता चूर      (7)

|| Sri Chintamani Parsvnath Stotra श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ स्तोत्र ||

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