No. 4 Santikaram Stotra संतिकरं स्तोत्र

Santikaram Stotra : संतिकरं स्तोत्र को परम पूज्य श्रीसोमसुंदरसुरीश्वरजी म.सा.की कृपा प्राप्त शिष्य पूज्य मुनीसुंदरसूरी जी महाराज यह उद्घोष करते हैं कि जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ प्रतिदिन तीन समय भगवान श्री शांतिनाथ की स्तुति करता है, उसके जीवन की सभीप्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं और उसे परम शांति व समृद्धि प्राप्त होती है।

।।संतिकरं स्तोत्र (Santikaram Stotra)।।

संतिकरं संतिजिणं. जगसरणं जय सिरिई दायारं;

समरामे भत्त-पालग.निव्वाणी-गरूड-कय सेवं……1

ॐस नमो विप्पोसहि-पत्ताणं,संतिसामि-पायाणं;

झों-स्वाहा-मंतेणं,सव्वासिव-दरिअ-हरणाणं…..2

ऊँ संति नमुक्कारो, खेलोसहिमाई-लद्धि-पत्ताणं;

सौं हीं नमो सव्वोसहि-पत्ताणं च देइसिरिं…..3

वाणी तिह्अण-सामिणि, सिरिदेवी जक्खरायगणि पिडगा;

गह-दिसिपाल-सूरिंदा, सयावि रक्खंतु जिणभत्ते…..4

 रक्खंतू मम रोहिणी , पन्नत्ती वज्जसिंखला य सया;

 वज्जंकुसि चक्केसरि, नरदत्ता काली महाकाली…..5

गोरी तह गंधारी, महजाला माणवि अ वईरूट्टा;

अच्छुत्ता माणसिया, महामाणसियाउ देवीओ…..6

जक्खा गोमह महजक्ख, तिमूह जक्खेस तलुंबरू कुसुमो;

मायंग-विजय-अजिया, बंभो मणुओ सुरकुमारोअ…..7

छम्मुह पयाल किन्नर, गरूलो गंधव्व तहय जक्खिंदो;

कूबेर वरूणो भिउडी, गोमेहो पास-मायंगा…..8

देवीओ चक्केसरि, अजिया दुरिआरि काली महाकाली;

अच्चुअ संता जाला, सुतारया-सोय सिरिवच्छा…..9

चंडाविजयंकुसि पन्नइत्ति निव्वाणि अच्चआ धरणी;

वईरूट्ट-छत्त-गंधारि, अंब पउमावई सिद्धा…..10

ईअ तित्थ-रक्खणरया , अन्नेविसुरासुरी य चउहावि;

वंतर जोईणि पमुहा, कुणंतु रक्खं सया अम्हं…..11

एवं सुदिटिठ सुरगण, सहिओ संघस्स संति जिणचंदो;

मज्झवि करेउ रक्खं, मुणिसुंदरसूरि-थूअ-महिमा…..12

ईअ संतिनाह सम्म-दिटिठ , रक्खं सरई तिकालं जो;

सव्वोवद्दव-रहिओ, स लहई सुहसंपयं परमं…..13

तवगच्छ गयण-दिणयर, जुगवर-सिरिसोमसंदरगुरूणं;

सुपसाय-लद्ध-गणहर, विज्जासिद्धी भणई सीसो…..14

।। संतिकरं स्तोत्र (Santikaram Stotra)।।

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