No . 53 Ajit Jindanshu Preetdi अजित जिणंदशुं प्रीतडी… जैन स्तवन
Ajit Jindanshu Preetdi.अजित जिणंदशुं प्रीतडी… (राग : ऋषभ जिणेश्वर प्रीतम. परमातम पूरणकला. एक पंखी.) अजित जिणंदशुं प्रीतडी, मुज न गमे हो बीजानो संग के; मालती फुले मोहियो, किम बेसे हो बावळ तरु भृंग के. ॥१॥ गंगा जलमां जे रम्या, किम छिल्लर हो रति पामे मराल के; सरोवर जलधर जल विना, नवि चाहे हो जग चातक

