016 Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra श्री बृहद् उवसग्गहरं स्तोत्र

श्री बृहद् उवसग्गहरं स्तोत्र

यह सभी प्रकार के उपसर्ग को दूर करने वाला महाप्रभविक श्री बृहद् उवसग्गहरम् स्तोत्र (Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra )है। यह स्तोत्र दो विभाग में विभाजित है। बृहद और लघु बृहद् 27 श्लोक प्रमाण है,एवं लघु 5 श्लोक प्रमाण है। श्लोक नम्बर 15 और 16 ने कहा है श्री पार्श्वनाथ भगवान के प्रभाव से पांडु रोग भगंदर दाह ज्वलन खासी श्वास शूल ऐसे सभी प्रकार के रोग तथा वैताल,महामारी,सर्प,दावानल वगेरे का नाश होता है। ऐसा महाप्रभाविक स्तोत्र का पाठ करने से तमाम प्रकार की व्याधियाँ दूर होती हैं

Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra

उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघणमुक्कं, 

विसहरविसनिन्नासं, मंगलकल्लाण आवासं ……..१

विसहरफुलिंगमंतं, कंठे धारेइ जो सया मणुओ, 

तस्स गह रोगमारी, दुट्ठजरा जंति उवसामं ………२

चिट्ठउ दूरे मंतो, तुज्झ पणामो वि बहु फलो होइ; 

नरतिरिएसु वि जीवा, पावंति न दुक्खदोगच्चं-…….३

ॐ अमरतरु कामधेणु, चिंतामणिकामकुंभमाइया; 

सिरिपासनाहसेवा, गहाण सव्वे वि दासत्तम् …….४

ॐ ह्रीं श्रीं ऐं तुह दंसणेण सामिय, पणासेइ रोगसोगदुक्ख दोहग्गं; 

कप्पतरुमिव जायइ, ॐ तुह दंसणेण सव्वफलहेउ स्वाहा. …..५

ॐ ह्रीं नमिऊणविग्धनासय, मायाबीएण धरणनागिंदं; 

सिरिकामराज कलियं पासजिणिदं नमंसामि- ……..६

ॐ ह्रीं श्रीं सिरिपासविसहर-विज्जामंतेण झाणझाएज्झा; 

धरणपउमावइदेवी, ॐ ह्रीं र् क्ष्म्लव्युं स्वाहा………७

ॐ जयउ धरणिंद- पउमावइ य नागिणी विज्जा;

विमलझा-णसहियो, ॐ ह्रीं र् क्ष्म्लव्युं स्वाहा. ……८

ॐ थुणामि पासनाहं, ॐ ह्रीं पणमामि परमभत्तीए, 

अट्ठक्खर धरणेन्दो, पउमावइ पयडिया कित्ती…….९

जस्स पयकमलमज्झे, सया वसेइ पउमावइ य धरणिंदो; 

तस्स नामइ सयलं, विसहरविसं नासेइ ……….१०

तुह समत्ते लद्धे, चिंतामणिकप्पपायव-ब्भहिए; 

पावंति अविग्घेणं, जीवा अयरामरं ठाणं ………११

ॐ नट्ठट्ठमयठाणं, पणट्ठकमट्ठसंसारे, 

परमट्ठानिट्ठिअट्ठे, अट्ठगुणाधिसरं वंदे ………….१२

ॐ गरुडो वनितापुत्रो, नागलक्ष्मी; महाबलः; 

तेणमुच्चंति मुसा, तेण मुच्वंति पन्नगाः ………१३

स तुह नाम सुद्धमंतं, सम्मं जो जवेइ सुद्धभावेण; 

सो अयरामरं ठाणं पावइ नय दोग्गइं, दुक्खं वा ……१४

ॐ पंडुभगंदरदाहं, कासं सासं च सूलमाइणि, 

पासपहुपभावेण, नासंति सयलरोगाइं ह्रीं स्वाहा …….१५

ॐ विसहरदावानल-साइणि वेयालमारिआयंका; 

सिरिनिलकंठपासस्स, स्मरणमित्तेण नासंति ………१६

पन्नास गोपीडां कुरग्रह, तुह दंसणं भयं काये; 

आवि न हुंति ए तह वि, तिसंझं जं गुणिज्जासो ……१७

पिंड जंत भगंदर खास, सास सूल तह निव्वाह; 

सिरिसा मलपास महंत, नाम पउर पऊलेण ……….१८

ॐ ह्रीं श्रीं पासधरणसंज्जुत्तं, विसहरविज्जं जवेइ सुद्धमणेणं, 

पावइ इच्छयं सुहं, ॐ ह्रीं श्रीं र् क्ष्म्लव्युं स्वाहा …….१९

ॐ रोग-जल-जलण-विसहर-चोरारि-मइंद-गय-रण-भयाइं; 

पासजिणनामसंकित्तेणेण, पसमंति सव्वाइं ह्रीं स्वाहा …..२०

ॐ जयउ धरणिंद नमंसिय, पउमावइपमुह निसेविया पाया 

ॐ क्लीं ह्रीं महासिद्धिं, करेइ पास जगनाहो ……….२१

ॐ ह्रीं श्रीं तं नमः पासनाहं, ॐ ह्रीं श्रीं धरणिंद नमंसियं दुहविणासं; 

ॐ ह्रीं श्रीं जस्स पभावेण सया, ॐ ह्रीं श्रीं नासंति उवद्दवा बहुसो ……२२

ॐ ह्रीं श्रीं पइं समरंताण मणे, ॐ ह्रीं श्रीं न होइ वाहि न तं महादुक्खं, 

ॐ ह्रीं श्रीं नामपि हि मंतसमं, ॐ ह्रीं श्रीं पयडं नत्थीत्थ संदेहो ……….२३

ॐ ह्रीं श्रीं जलजलणभय तह सप्पसिंह, ॐ ह्रीं श्रीं चौरारिसंभवे खिप्पं, 

ॐ ह्रीं श्रीं जो समरेइ पासपहुं, ॐ श्रीं क्लीं पहुविकयावि किं तस्स……..२४

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ह्रीं इह लोग‌ट्ठी परलोग‌ट्ठी, ॐ ह्रीं श्रीं जो समरेइ पासनाहं, 

ॐ ह्राँ ह्रीँ ह्रुँ ह्रँ ग्राँ ग्रीँ ग्रुँ ग्रः तं तह सिज्झइ खिप्पं ……….२५

इह नाह समरह भगवंत, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ग्राँ ग्रीं

ग्रुँ ग्रः क्लीं क्लीं श्रीकलिकुंडस्वामिने नमः …………२६

इअ संथुओ महायस!, भत्तिब्भरनिब्भरेण हियएण;

ता देव दिज्ज बोहिं भवे भवे पासजिणचंद ……….२७

Shree Bruhad Uvasaggaharam Stotra श्री बृहद् उवसग्गहरं स्तोत्र

लघु उवसग्गहरम् स्तोत्र 

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *