No. 28 Shatrunjay Laghu Kalp शत्रुंजय लघुकल्प

Shatrunjay Laghu Kalp शत्रुंजय लघुकल्प

अईमुत्तय केवलिणा, कहिअंसेत्तुंजतित्थमाहप्पं, 

नारयरिसिस्स पुरओ, तं निसुणह भावओ भविआ.     1

सेत्तुंजे पुंडरिओ, सिद्धो मुणिकोडिपंचसंजुत्तो; 

चित्तस्स पुण्णिमाए, सो भण्णइ तेण पुंडरिओ….        2

नमि विनमि रायाणो, सिद्धा कोडीहिं दोहिं साहूणं; 

तह दविडवालिखिल्ला, निव्वुआ दस य कोडीओ.      3

पज्जुन्न संबपमुहा, अद्भुट्ट्ठाओ कुमारकोडीओ; 

तह पंडवा वि पंच य, सिद्धि गया नारयरिसी य.         4

थावच्चासुय सेलगा य, मुणिणो वि तह राममुणी; 

भरहो दसरहपुत्तो, सिद्धा वंदामि सेत्तुंजे…………       5

अन्नेवि खवियमोहा, उसभाइ विसालवंससंभूआ; 

जे सिद्धा सेत्तुंजे, तं नमह मुणी असंखिज्जा.              6

पन्नासजोयणाई, आसी सेत्तुंजवित्थरो मूले; 

दसजोयण सिहरतले, उच्चत्तं जोयणा अट्ठ.              7

जं लहइ अन्नतित्थे, उग्गेण तवेण बंभचेरेण; 

तं लहइ पयत्तेणं, सेत्तुंजगिरिम्मि निवसंतो.               8

जं कोडिए पुण्णं, कामिय आहारभोईया जे उ; 

तं लहइ तत्थ पुण्णं एगोववासेण सेत्तुंजे.                  9

जं किंचि नामतित्थं, सग्गे पायालि माणुसे लोए; 

तं सव्वमेव दिठं, पुंडरिए वंदिए संते.                    10

पडिलाभंते संघ, दिट्ठमदिट्ठे य साहू सेत्तुंजे, 

कोडिगुणं च अदिट्ठे, दिट्ठे अ अणंतयं होइ.            11

केवलनाणुप्पत्ती, निव्वाणं आसि जत्थ साहूणं; 

पुंडरिए वंदित्ता, सव्वे ते वंदिया तत्थ.                    12

अट्ठावयसम्मेए, पावा चंपाइ उज्जंतनगेय; 

वंदित्ता पुण्णफलं, सयगुणं तंपि पुंडरिए.                13

पूआकरणे पुण्णं, एगगुणं सयगुणं च पडिमाए; 

जिणभवणेण सहस्सं-णंतगुणं पालणे होइ.              14

पडिमं चेइहरं वा, सित्तुंजगिरिस्स मत्थए कुणई; 

भुत्तूण भरहवासं, वसइ सग्गे निरुवसग्गे.               15

नवकार पोरिसीए, पुरिमड्ढेगासणं च आयामं; 

पुंडरियं च सरंतो, फलकंखी कुणइ अभत्तठं.         16

छट्ट्ठट्ठमदसमदुवालसाणं, मासद्धमासखवणाणं; 

तिगरणसुद्धो लहई, सित्तुंजं संभरंतो अ.                17

छठेणं भत्तेणं, अपाणेणं तु सत्त जत्ताइं; 

जो कुणइ सेत्तुंजे, तइयभवे लहइ सो मुक्खं.            18

अज्जवि दीसइ लोए, भत्तं चइऊण पुंडरियनगे; 

सग्गे सुहेण वच्चइ, सीलविहूणोवि होऊणं.              19

छत्तं झयं पडागं, चामरभिंगारथालदाणेणं; 

विज्जाहरो अ हवइ, तह चक्की होइ रहदाणा.          20

दस वीस तीस चत्ताल, पन्नासा पुप्फदामदाणेण; 

लहइ चउत्थछट्ठट्ठम-दसमदुवालसफलाई.              21

धूवे पक्खुववासो, मासक्खमणं कपूरधूवम्मि; 

कित्तिय मासक्खमणं, साहू पडिलाभिए लहइ.         22

न वि तं सुवन्नभूमि-भूसणदाणेण अन्नतित्थेसु; 

जं पावइ पुण्णफलं, पूआन्हवणेण सित्तुंजे.              23

कंतार चोर सावय-समुद्ददारिद्दरोगरिउरुद्दा; 

मुच्चंति अविग्घेणं, जे सेत्तुजं धरन्ति मणे.                24

सारावलीपयन्नग-गाहाओ सुअहरेण भणिआओ; 

जो पढई गुणइ निसुणइ, सो लहइ सित्तुंज्जत्तफलं.    25

Shatrunjay Laghu Kalp शत्रुंजय लघुकल्प

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