No. 40 Sri Sarpa Vishaphaar Stotram – श्री सर्पविषापहार स्तोत्रम्

श्री सर्पविषापहार स्तोत्रम् श्री आचार्य देवसूरीश्वरजी म.सा. रचित

ॐ इलमित्ते तिलमित्ते,

इलतिल मित्त,

डुंबे डुबेलिसे, 

डुस्से डुस्सेलिए,

डुग्गे डुग्गेलिए, 

तक्के तक्करने, 

जक्के जक्करने, 

अक्के अक्करने, 

मम्मे मम्मरने, 

सिंझे सिंझं करणे, 

काश्मीरे कश्मीर मंडने, 

अनधे अनधाधने, 

अधयन्ते, अखयन्ते, 

पेयं पायन्ते श्वेते श्वेत तुंडे अनुरक्त (स्ते)ठ: ठ: ठः स्वाहा।

Sri Sarpa Vishaphaar Stotram श्री सर्पविषापहार स्तोत्रम्

 

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