प्रस्तुत श्री शांतिनाथ स्तोत्र (Shree Shantinath Stotra) में 16 विद्या देवी 64 इंद्र जया विजया विद्यादेवियों से जीवन में शांति तुष्टि और शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। श्री शांतिनाथ भगवान के इस स्तोत्र के पाठ से ज्वर भगंदर,खांसी,दमा,अन्य भयंकर बीमारियाँ या व्याधियां नहीं आती है। भय और उपद्रव का निवारण होता है। दुष्ट व्यंतर आदि के उपद्रव शांत होते है।
Shree Shantinath Stotra श्री शान्तिनाथ स्तोत्र
विश्वातिशायिमहिमा, ज्वलत्तेजो विराजितम्;
शान्तिं शान्तिकरं स्तौमि, दुरितव्रातशान्तये …………१
षोडशविद्यादेव्योपि, चतुषष्टिसुरेश्वराः,
ब्रह्मादयश्च सर्वेपि, यं सेवन्ति कृतादराः …………….२
ॐ ह्रीं श्रीं जये विजये, ॐ अजये परैरपि,
ॐ तुष्टिं कुरु कुरु पुष्टिं, कुरु कुरु शातिं महाजये ! …..३
न क्वापि व्याधयो देहे, न ज्वरा न भगंदराः
कासश्वासादयो नैव, बाधन्ते शान्तिसेवनात् …………४
यक्षभूतपिशाचाद्या, व्यंतरा दुष्ट मुद्गलाः,
सर्वे शाम्यन्तु मे नाथ!, शान्तिनाथसुसेवया …………५
।।Shree Shantinath Stotra श्री शान्तिनाथ स्तोत्र।।
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