Omkara Vidya Stavan

No. 25 Omkara Vidya Stavan ॐकार विद्या स्तव ज्ञानी बनाने हेतु मंत्र

Omkara Vidya Stavan ॐकार विद्या स्तवन यह ऊँकार विद्या स्तवन (Omkara Vidya Stavan) का पाठ करने से मनुष्य को स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र का जाप अज्ञानी को ज्ञानी बनाता है।अहंकार को मुक्त बनाकर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि को प्रदान करवाता है। प्रणवस्त्वं ! परब्रह्मन् ! लोकनाथ ! जिनेश्वर

Shodasnam Saraswati Stotra

No. 24 Shodasnam Saraswati Stotra षोडशनाम सरस्वती स्तोत्र

Shodasnam Saraswati Stotra  षोडशनाम सरस्वती स्तोत्र नमस्ते शारदे देवि !, काश्मीरपुरवासिनि !;  त्वामहं प्रार्थये मातः, विद्यादानं प्रदेहि मे ||1|| प्रथमं भारतीनाम, द्वितीयं च सरस्वती;  तृतीयं शारदादेवी, चतुर्थं हंसगामिनी ||2|| पंचमं विदुषां माता, षष्ठं वागीश्वरी तथा;  कुमारी सप्तमं प्रोक्तं, अष्टमं ब्रह्मचारिणी ||3|| नवमं त्रिपुरा देवी, दशमं ब्राह्मिणी तथा;  एकादशं च ब्रह्माणि, द्वादशं ब्रह्मवादिनी ||4|| वाणी त्रयोदशं

Sarasvati Stotra

No. 23 Sarasvati Stotra सरस्वती स्तोत्र ज्ञान की प्राप्ति और बुद्धि तीव्र करने हेतु मंत्र जाप

Sarasvati Stotra सरस्वती स्तोत्र (सिद्धसारस्वताचार्य श्रीमद् बप्पभट्टिसूरि कृत) कलमरालविहङ्गमवाहना, सितदुकूलविभूषणलेपना; प्रणतभूमिरुहामृतसारिणी, प्रवरदेहविभाभरधारिणी ||1|| अमृतपूर्णकमण्डलुहारिणी, त्रिदशदानवमानवसेविता; भगवती परमैव सरस्वती मम पुनातु सदा नयनाम्बुजम्.||2|| जिनपतिप्रथिताखिलवाड्मयी, गणधराननमण्डपनर्तकी; गुरुमुखाम्बुजखेलनहंसिका, विजयते जगति श्रुतदेवता.||3|| अमृतदीधितिबिम्बसमाननां, त्रिजगती जननिर्मितमाननाम्; नवरसामृतवीचिसरस्वतीं, प्रमुदितः प्रणमामि सरस्वतीम्.||4|| विततकेतकपत्रविलोचने! विहितसंसृतिदुष्कृतमोचने !; धवलपक्षविहङ्गम् लाञ्छिते; जय सरस्वति ! पूरितवाञ्छिते !||5|| भवदनुग्रहलेशतरङ्गिता-स्तदुचितं प्रवदन्ति विपश्चितः;  नृपसभासु यतः कमलाबला, कुचकलाललनानिवितन्वते ||6|| गतधना अपि हि

Shree Gautam Astak

No. 11 Shree Gautam Astak श्री गौतम अष्टक

  Shree Gautam Astak श्री गौतम अष्टक श्रीइंद्रभूर्ति वसुभूतिपुत्रं, पृथ्वीभवं गौतमगोत्ररत्नम्; स्तुवन्ति देवाः सुरमानवेन्द्राः स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे १ श्रीवर्द्धमानात् त्रिपदीमवाप्य, मुहूर्तमात्रेण कृतानि येन, अंगानि पूर्वाणि चतुर्दशापि, स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे……२ श्रीवीरनाथेन पुरा प्रणीतं, मंत्रं महानंदसुखाय यस्यः ध्यायन्त्यमी सूरिवराः समग्राः, स गौतमो यच्छतु वाञ्छितं मे .. ३ यस्याभिधानं मुनयोऽपि सर्वे, गृह्णन्ति भिक्षाभ्रमणस्य काले;

Kalyan Mandir Stotra

No. 20 Kalyan Mandir Stotra कल्याण मंदिर स्तोत्र 

कल्याण मंदिर स्तोत्र  Kalyan Mandir Stotra कल्याण-मंदिरमुदारमवद्य भेदि,  भीताभय-प्रदमनिन्दितमध्रि-पद्मम्; संसार-सागर-निमज्जदशेष-जन्तु- पोतायमानमभिनम्य जिनेश्वरस्य. ……..१ यस्य स्वयं सुरगुरुर्गरिमाम्बुराशेः,  स्तोत्रं सुविस्तृतमतिर्न विभुर्विधातुम्;  तीर्थेश्वरस्य कमठ-स्मय-धूमकेतो,  स्तस्याहमेष क्लि संस्तवनं करिष्ये (युग्मम्). २  सामान्यतोऽपि तव वर्णयितुं स्वरूप- मस्मादृशाः कथमधीश ! भवन्त्यधीशाः ?;  धृष्टोऽपि कौशिक-शिशुर्यदिवा दिवान्धो,  रूपं प्ररूपयति किं किल घर्मरश्मेः?. …….३ मोहक्षयादनुभवन्नपि नाथ! र्मत्यो, नूनं गुणान् गणयितुं न तव क्षमेत;  कल्पान्त-वान्त-पयसः

Shree Shantinath Stotra

015 Shree Shantinath Stotra श्री शान्तिनाथ स्तोत्र

प्रस्तुत श्री शांतिनाथ स्तोत्र (Shree Shantinath Stotra) में 16 विद्या देवी 64 इंद्र जया विजया विद्यादेवियों से जीवन में शांति तुष्टि और शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। श्री शांतिनाथ भगवान के इस स्तोत्र के पाठ से ज्वर भगंदर,खांसी,दमा,अन्य भयंकर बीमारियाँ या व्याधियां नहीं आती है। भय और उपद्रव का निवारण होता है। दुष्ट