Shri Parshvanath Vishahar Stotram : यह पार्श्वनाथ विषहर स्तोत्र हर एक प्रकार के विष को दूर करने वाला अत्यंत प्रभावी स्रोत है। यदि किसी को भी बुखार आया हो तो इस स्रोत का शुद्धिपूर्वक त्रिकाल 21 बार जाप करने से भयंकर में भयंकर बुखार भी नाश हो जाता है। कान की पीड़ा बालक संबंधी पीड़ा ऐसी बड़ी या छोटी औषधीय बीमारी को भी इसके जाप करने से इस स्रोत के जाप करने से दूर होती है। इस स्रोत में पार्श्वनाथ परमात्मा की विशिष्ट तौर से प्रार्थना की गई है।
।।Shri Parshvanath Vishahar Stotramश्री पार्श्वनाथ विषहर स्तोत्र।।
ॐजीतुं ॐजीतुं ॐजीतुं उपशमधरी, ओह्रीं पार्श्व अक्षरजपंते
भूतने प्रेत ज्योतीष व्यंतर सुरा, उपशमे वार एकवीस गुणंते,
ॐजीतुं० …१
दुष्ट ग्रह रोग शोक जरा जंतुने, ताव एकांतरो दिन तपंते
गर्भ बंध निवार सर्प वींछी विष, बालिका बाळनी व्याधि हंते,
ॐजीतुं० ….२
शायणि डायणि रोहीणी, रांधणी, फोटीका मोटिका दुष्टहंती
दाढ उदर तणी कौल नोला तणी, स्वान शियाल विकराल दंती
ॐजीतुं०…..३
धरणी पदमावती समरी शोभवती, वाट अघाट अटवी अटन्ते;
लक्ष्मी लुंदो मले सूजस वेला वळे, सयल आशाफले मनहसंते,
ऊँजीतुं० ….४
अष्ट महाभय हरे कान पीडा टळे, उतरे शूल शीशक भणंते;
वदति वर प्रीतश्युं प्रीति विमल प्रभो, पार्श्वजिन नाम अभिराम मंते ॐजीतुं०… ५
।।Shri Parshvanath Vishahar Stotramश्री पार्श्वनाथ विषहर स्तोत्र।।
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