Jinpanjar Stotra

No. 7 – Jinpanjar Stotra जिनपंजर स्तोत्र

 ।।जिनपंजर स्तोत्र Jinpanjar Stotra।। Jinpanjar Stotra : जिनपंजर स्तोत्र इसमें पंच परमेष्ठि  एवं तीर्थंकर परमात्मा 24 तीर्थंकर परमात्मा की स्थापना अपने संपूर्ण शरीर पर होती है। इस स्तोत्र को यदि प्रातः स्मरण किया जाए तो शत्रु आदि का नाश होता है, सिंह सर्प आदि हिंसक पशुओं से रक्षण होता है, भूत प्रेत इत्यादि आसुरी शक्ति

Uvasaggaharam Stotra

No. 6 Uvasaggaharam Stotra उवसग्गहरं स्तोत्र 

Uvasaggaharam Stotra : श्री भद्रबाहु स्वामी रचित यह महाप्रभाविक उवसग्गहरम् स्तोत्र है। इस स्तोत्र में 23 वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ प्रभु की स्तवना आती है।उपसर्गों का नाश करने वाला होने से इस स्तोत्र का नाम उवसग्गहरम्  रखा गया है। इस स्तोत्र के स्मरण से महामारी जैसी भयंकर बीमारी दूर हुई है। यह दो कैटेगरीज में

Bhaktamer Stotra भक्तामर स्तोत्र

No. 5 Bhaktamer Stotra भक्तामर स्तोत्र 

।।भक्तामर स्तोत्र Bhaktamer Stotra।। Bhaktamer Stotra : भक्तामर स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंग ने की थी। राजा भोज के द्वारा कारागार (जेल) में डाले जाने और 44 बेडियों-तालों से जकडे जाने पर. आचार्य ने प्रथम तीर्थकर आदिनाथ की स्तृति में इन 44 श्लोकों की रचना की थी।स्तृति के पूर्ण होने पर सभी बेड़ियाँ और ताले

Santikaram Stotra

No. 4 Santikaram Stotra संतिकरं स्तोत्र

Santikaram Stotra : संतिकरं स्तोत्र को परम पूज्य श्रीसोमसुंदरसुरीश्वरजी म.सा.की कृपा प्राप्त शिष्य पूज्य मुनीसुंदरसूरी जी महाराज यह उद्घोष करते हैं कि जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ प्रतिदिन तीन समय भगवान श्री शांतिनाथ की स्तुति करता है, उसके जीवन की सभीप्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं और उसे परम शांति व समृद्धि

Tijaypahut Stotra

No. 3 Tijaypahut Stotra तिजयपहूत्त स्तोत्र 

  ।।Tijaypahut Stotra तिजयपहूत्त स्तोत्र।। इस तिजयपहूत्त स्तोत्र (Tijaypahut Stotra) में विभिन्न संख्याओं के तीर्थकर समुहों का स्मरण करते हुए यह प्रार्थना की जाती है, कि वे सच्चे भक्तों के समस्त पाप कर्मों को नष्ट कर दें।स्तोत्र के पद्यों में तीर्थकरों से यह प्रार्थना की जाती है कि वे गृह दोष, भूत-पिशाच, भयानक बीमारी (ज्वर), आग,

Shree Bruhad Rushimandal Stotra

No. 2 Shree Bruhad Rushimandal Stotra – श्री बृहद ऋषिमंडल स्तोत्र 

श्री बृहद ऋषिमंडल स्तोत्र (Shree Bruhad Rushimandal Stotra)अत्यंत प्रभावशाली है इस को अचिंत्य और अत्यन्त प्रभावी माना गया है, जो तंत्र प्रभाव से युक्त है। इसमें अर्हंम् और ह्रिँ बीजाक्षरों की शक्ति का वर्णन है,अर्हंम् में 9 पद और ह्रीँ’ में चौबीस तीर्थंकरों की स्थापना का विधान बताया गया है। इसमें लक्ष्मी आदि महादेवियों की

Atmaraksha Navkar Mantra

No.1 Atmaraksha Navkar Mantra | आत्मरक्षा नवकार मंत्र 

Atmaraksha Navkar Mantra :आत्मरक्षा नवकार मंत्र। इस स्तोत्र के प्रभाव से साधक के शरीर की रक्षा होती है। यह स्तोत्र सभी प्रकार की आने वाली आधि व्याधि से सुरक्षा प्रदान करता है। प्रतिदिन इसका पाठ करने से जीवन मे मंगल ही मंगल होता है।   Atmaraksha Navkar Mantra – आत्मरक्षा नवकार मंत्र ॐ परमेष्ठि नमस्कारं, सारं