Shree Shantinath Stotra

015 Shree Shantinath Stotra श्री शान्तिनाथ स्तोत्र

प्रस्तुत श्री शांतिनाथ स्तोत्र (Shree Shantinath Stotra) में 16 विद्या देवी 64 इंद्र जया विजया विद्यादेवियों से जीवन में शांति तुष्टि और शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। श्री शांतिनाथ भगवान के इस स्तोत्र के पाठ से ज्वर भगंदर,खांसी,दमा,अन्य भयंकर बीमारियाँ या व्याधियां नहीं आती है। भय और उपद्रव का निवारण होता है। दुष्ट

Panchashashti Stotra

No.014 Panchashashti Stotra पंचषष्टि स्तोत्र

श्री जयतिलक सूरी महाराज के शिष्य द्वारा यह पंचषष्ठि स्तोत्र (Panchashashti Stotra)की रचना की गई है।श्रद्धा और भक्ति के साथ जो भाग्यशाली इस यंत्र की पूजा करता है उसके घर में भूत प्रेत और पिशाच आदि का कोई भी भय नहीं रहता है। यह एक अत्यंत प्रभावशाली गुप्त मन्त्रों से भरा हुआ पैसठिया यंत्र है

श्री महावीर स्वामी स्तोत्र

013 Shree Mahaveer Swami Stotra श्री महावीर स्वामी स्तोत्र

प्रस्तुत स्तोत्र (Shree Mahaveer Swami Stotra )24 वें तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी भगवान की स्तुति करने में आयी है। यह एक अत्यंत प्रभावशाली संक्षिप्त स्तोत्र है। इस स्तोत्र के पाठ करने से शांति,सुरक्षा,रिद्धि,सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।“ऊँ ह्रीँ अर्हम् महावीराय नमः” इस मंत्र का शुद्ध उच्चारपूर्वक हमेशा जाप करने से सभी प्रकार के

012 Shree Bruhadshanti

012 Shree Bruhadshanti श्री बृहद्शांति

                      श्री बृहद्शांति Shree Bruhadshanti बृहद्‌शांति (Shree Bruhadshanti) स्नात्र एवम् पूजनो केअंत में, अंजनशलाका प्राणप्रतिष्ठा जैसे परम मांगलिक विधानों में इसकी प्रधान भूमिका होती है.इसमें चतुर्विध श्रीसंघ एवम् समस्त ब्रह्माण्ड के शांति की कामना की जाती है. इस स्तोत्र के पठन से 24 तीर्थंकर एवम्

Shree Jirawala Parshwanath Stotra

010 Shree Jirawala Parshwanath Stotra-श्री जीरावल्ला पार्श्वनाथ स्तोत्र

अट्टे मट्टे आदि परम प्रभाविक मंत्र से पूर्ण श्री जीरावल्ला पार्श्वनाथ स्तोत्र (Shree Jirawala Parshwanath Stotra-) की रचना महान मंत्रवेत्ता श्री मेरुतुंग सूरीजी महाराज [अचलगच्छाचार्य] ने की थी इस स्तोत्र के अनेक प्रभाव है। इसमे जैनधर्म के 23 वें तीर्थंकर श्री जीरावल्ला पार्श्वनाथ भगवानकी विशेष तोर से स्तवना की गई है इस स्तोत्र की पूर्ण

Mantradhiraja Parshva Stotra

No. 9 Mantradhiraja Parshva Stotra – श्री मंत्राधिराज पार्श्वस्तोत्र

  Mantradhiraja Parshva Stotra : श्री मंत्राधिराज पार्श्वस्तोत्र इस स्रोत में पार्श्वनाथ परमात्मा के एक सौ आठ नाम से स्तवना की गई है। त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं, नित्यं प्राप्नोति स श्रियम् मतलब जो व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ त्रिकाल यानी कि सुबह दोपहर शाम पूर्ण श्रद्धा के साथ करता है।उसे निश्चित तौर से लक्ष्मी सुख समृद्धि

Mantradhiraja Parshva Stotra

No. 8 Shri Parshvanath Vishahar Stotram श्री पार्श्वनाथ विषहर स्तोत्र

Shri Parshvanath Vishahar Stotram : यह पार्श्वनाथ विषहर स्तोत्र हर एक प्रकार के विष को दूर करने वाला अत्यंत प्रभावी स्रोत है।  यदि किसी को भी बुखार आया हो तो इस स्रोत का शुद्धिपूर्वक त्रिकाल 21 बार जाप करने से भयंकर में भयंकर बुखार भी नाश हो जाता है। कान की पीड़ा बालक संबंधी पीड़ा

Jinpanjar Stotra

No. 7 – Jinpanjar Stotra जिनपंजर स्तोत्र

 ।।जिनपंजर स्तोत्र Jinpanjar Stotra।। Jinpanjar Stotra : जिनपंजर स्तोत्र इसमें पंच परमेष्ठि  एवं तीर्थंकर परमात्मा 24 तीर्थंकर परमात्मा की स्थापना अपने संपूर्ण शरीर पर होती है। इस स्तोत्र को यदि प्रातः स्मरण किया जाए तो शत्रु आदि का नाश होता है, सिंह सर्प आदि हिंसक पशुओं से रक्षण होता है, भूत प्रेत इत्यादि आसुरी शक्ति

Uvasaggaharam Stotra

No. 6 Uvasaggaharam Stotra उवसग्गहरं स्तोत्र 

Uvasaggaharam Stotra : श्री भद्रबाहु स्वामी रचित यह महाप्रभाविक उवसग्गहरम् स्तोत्र है। इस स्तोत्र में 23 वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ प्रभु की स्तवना आती है।उपसर्गों का नाश करने वाला होने से इस स्तोत्र का नाम उवसग्गहरम्  रखा गया है। इस स्तोत्र के स्मरण से महामारी जैसी भयंकर बीमारी दूर हुई है। यह दो कैटेगरीज में

Bhaktamer Stotra भक्तामर स्तोत्र

No. 5 Bhaktamer Stotra भक्तामर स्तोत्र 

।।भक्तामर स्तोत्र Bhaktamer Stotra।। Bhaktamer Stotra : भक्तामर स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंग ने की थी। राजा भोज के द्वारा कारागार (जेल) में डाले जाने और 44 बेडियों-तालों से जकडे जाने पर. आचार्य ने प्रथम तीर्थकर आदिनाथ की स्तृति में इन 44 श्लोकों की रचना की थी।स्तृति के पूर्ण होने पर सभी बेड़ियाँ और ताले

Santikaram Stotra

No. 4 Santikaram Stotra संतिकरं स्तोत्र

Santikaram Stotra : संतिकरं स्तोत्र को परम पूज्य श्रीसोमसुंदरसुरीश्वरजी म.सा.की कृपा प्राप्त शिष्य पूज्य मुनीसुंदरसूरी जी महाराज यह उद्घोष करते हैं कि जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ प्रतिदिन तीन समय भगवान श्री शांतिनाथ की स्तुति करता है, उसके जीवन की सभीप्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं और उसे परम शांति व समृद्धि

Tijaypahut Stotra

No. 3 Tijaypahut Stotra तिजयपहूत्त स्तोत्र 

  ।।Tijaypahut Stotra तिजयपहूत्त स्तोत्र।। इस तिजयपहूत्त स्तोत्र (Tijaypahut Stotra) में विभिन्न संख्याओं के तीर्थकर समुहों का स्मरण करते हुए यह प्रार्थना की जाती है, कि वे सच्चे भक्तों के समस्त पाप कर्मों को नष्ट कर दें।स्तोत्र के पद्यों में तीर्थकरों से यह प्रार्थना की जाती है कि वे गृह दोष, भूत-पिशाच, भयानक बीमारी (ज्वर), आग,

Shree Bruhad Rushimandal Stotra

No. 2 Shree Bruhad Rushimandal Stotra – श्री बृहद ऋषिमंडल स्तोत्र 

श्री बृहद ऋषिमंडल स्तोत्र (Shree Bruhad Rushimandal Stotra)अत्यंत प्रभावशाली है इस को अचिंत्य और अत्यन्त प्रभावी माना गया है, जो तंत्र प्रभाव से युक्त है। इसमें अर्हंम् और ह्रिँ बीजाक्षरों की शक्ति का वर्णन है,अर्हंम् में 9 पद और ह्रीँ’ में चौबीस तीर्थंकरों की स्थापना का विधान बताया गया है। इसमें लक्ष्मी आदि महादेवियों की

Atmaraksha Navkar Mantra

No.1 Atmaraksha Navkar Mantra | आत्मरक्षा नवकार मंत्र 

Atmaraksha Navkar Mantra :आत्मरक्षा नवकार मंत्र। इस स्तोत्र के प्रभाव से साधक के शरीर की रक्षा होती है। यह स्तोत्र सभी प्रकार की आने वाली आधि व्याधि से सुरक्षा प्रदान करता है। प्रतिदिन इसका पाठ करने से जीवन मे मंगल ही मंगल होता है।   Atmaraksha Navkar Mantra – आत्मरक्षा नवकार मंत्र ॐ परमेष्ठि नमस्कारं, सारं